यूपी में 30 अप्रैल तक 100% फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्यउत्तर प्रदेश में जायद 2026 सीजन की तैयारियों के तहत सरकार ने 'फार्मर रजिस्ट्री' को लेकर अभियान तेज कर दिया है. निर्देश दिए गए हैं कि 30 अप्रैल 2026 तक 100 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए. इसके लिए विशेष रूप से उन गांवों पर फोकस किया जा रहा है जहां अब तक रजिस्ट्री का सैचुरेशन कम है. अभियान के तहत सभी भूमिधर किसानों को शामिल किया जाएगा, चाहे वे पीएम किसान योजना के लाभार्थी हों या नहीं. प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 मई 2026 से फार्मर आईडी अनिवार्य कर दी जाएगी. इसके बिना किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, उर्वरकों और बीज का लाभ नहीं मिल सकेगा. ऐसे में किसानों को समय रहते अपना पंजीकरण पूर्ण कराने की सलाह दी गई है.
कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि किसानों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणाएं, स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन और ग्राम प्रधानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि हर किसान तक जानकारी पहुंच सके और रजिस्ट्रेशन में तेजी आए.
इसी क्रम में जायद 2026 के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे भी निर्धारित समय सीमा में संचालित किया जाएगा. इसके लिए 28 अप्रैल 2026 को जिला स्तरीय टीमों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 1 मई से 31 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में सर्वे अभियान चलाया जाएगा. इस सर्वे के माध्यम से फसलों का सटीक आंकलन कर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी.
बता दें कि फार्मर रजिस्ट्री केंद्र सरकार की एग्री स्टैक योजना के तहत किसानों का एक बड़ा डिजिटल डेटाबेस है, जो किसानों को 11 अंकों की विशेष किसान आईडी (Kisan ID) दी जाएगी. यह आधार से जुड़ी एक डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण, मालिकाना भूमि के रिकॉर्ड और बोई गई फसल की जानकारी दर्ज होती है, ताकि किसान सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकें.
कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि किसान आईडी एक विशेष पहचान है, जो प्रत्येक अन्नदाता को एक डिजिटल आईडी मिलती है, जिससे पहचान काफी आसान हो जाती है. उन्होंने बतया कि सरकारी योजनाओं का लाभ, जिसमें बीज, खाद, सब्सिडी और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी योजनाओं के लिए बार-बार कागज (खतौनी) देने की आवश्यकता नहीं होगी.
इसके तहत डिजिटल रिकॉर्ड में किसान का नाम, जमीन का विवरण (खसरा/खतौनी) और बोई गई फसल की जानकारी एक जगह उपलब्ध रहती है. वहीं, आईडी से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों सीधे फायदा पहुंचेगा.
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