दिल्ली में होगी गेहूं की खरीद (सांकेतिक तस्वीर)राजधानी दिल्ली के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. पांच साल के इंतजार के बाद दिल्ली में फिर से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने जा रही है. भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India- FCI) अब सीधे किसानों से गेहूं खरीदेगी, जिससे उन्हें अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद केंद्र ने यह फैसला लिया. 2021 में बंद हुई खरीद को फिर शुरू कराने के लिए उन्होंने लगातार कोशिश की और आखिरकार रबी सीजन में खरीद बहाल करने की मंजूरी मिल गई. सीएम रेखा गुप्ता ने इस फैसले पर केंद्र सरकार का आभार जताया और पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, सरकारी खरीद 24 अप्रैल से नरेला और नजफगढ़ मंडियों से शुरू होगी. अब तक किसान मजबूरी में अपनी उपज दूसरे राज्यों की मंडियों में ले जाते थे या कम दाम पर बेचते थे, लेकिन अब उन्हें अपने ही शहर में फसल बेचने का मौका मिलेगा.
दिल्ली में भले ही खेती का रकबा सीमित है, लेकिन उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है. करीब 29 हजार हेक्टेयर में खेती से 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं निकलता है. ऐसे में बड़ी मात्रा में बचा अनाज अब सीधे सरकारी खरीद में जाएगा, जिससे करीब 21 हजार किसानों को सीधा फायदा होगा.
अब तक स्थानीय खरीद न होने से किसान अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे दाम पर फसल बेचने को मजबूर थे. इस फैसले से उनकी सबसे बड़ी परेशानी दूर होगी और उन्हें तय समर्थन मूल्य (2585 रुपये प्रति क्विंटल) मिलने का रास्ता साफ होगा.
सरकार ने साफ किया है कि खरीद केंद्रों पर किसानों को आधार कार्ड, जमीन के कागज और बैंक पासबुक साथ लानी होगी. वहीं, बहुत जल्द गांववार शेड्यूल भी जारी किया जाएगा, ताकि खरीद प्रक्रिया बिना किसी अव्यवस्था के पूरी हो सके.
एक बयान में कहा गया कि स्थानीय खरीद का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. इससे दिल्ली की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए सीधे गेहूं मिलेगा और बाहर भेजे जाने वाले अनाज पर भी लगाम लगेगी. इससे बाजार में संतुलन बेहतर होगा और सप्लाई सिस्टम मजबूत बनेगा.
बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद जारी है. इनमें से कुछ राज्यों में किसानों को एमएसपी के अलावा बोनस या ट्रांसपोर्ट/ गेहूं की सफाई के लिए अतिरिक्त राशि भी दी जा रही है.(पीटीआई)
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