मुंबई से दुनिया तक मिठास का पासपोर्टमुंबई की उमस भरी शाम में जब एयर इंडिया के विमान लंदन, न्यूयॉर्क और फ्रैंकफर्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ान भरने की तैयारी करते हैं, तो उनके कार्गो होल्ड में एक खास तरह का “यात्री” भी सफर पर निकलता है-भारत के रसीले और सुगंधित आम.
यह सिर्फ एक निर्यात प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की कृषि ताकत और वैश्विक बाजारों में उसकी बढ़ती पहचान का प्रतीक है, जहां हर डिब्बे में समाई होती है भारतीय गर्मियों की मिठास और किसानों की मेहनत की खुशबू.
महाराष्ट्र और गुजरात भारत के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में गिने जाते हैं. यहां उगाए जाने वाले अल्फांसो और केसर आम अपनी मिठास, सुगंध और बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं. यही कारण है कि इन आमों की मांग दुबई, लंदन, अमेरिका और यूरोप के कई देशों में लगातार बढ़ रही है.
विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवार हर साल गर्मियों में इन आमों का बेसब्री से इंतजार करते हैं. उनके लिए ये आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि अपने देश की याद और भावनाओं से जुड़ा स्वाद हैं.
भारतीय आमों को विदेश भेजने में मुंबई की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है. महाराष्ट्र और गुजरात के आम उत्पादक क्षेत्रों के नजदीक होने के कारण मुंबई इस पूरे अभियान का मुख्य केंद्र बन गया है.
यहां के कार्गो टर्मिनलों से आमों की खेप लंदन, फ्रैंकफर्ट, दुबई, न्यूयॉर्क और न्यूर्क जैसे बड़े शहरों के लिए भेजी जाती है. आम के सीजन के दौरान लंदन के लिए हर सप्ताह लगभग 180 टन आम भेजे गए. वहीं फ्रैंकफर्ट को 40 टन और दुबई, न्यूयॉर्क तथा न्यूर्क को करीब 30-30 टन आम हर सप्ताह पहुंचाए गए.
आम एक जल्दी खराब होने वाला फल है. इसलिए इसे विदेश भेजते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है. आमों को पहले खेतों से रेफ्रिजरेटेड यानी ठंडे ट्रकों में एयरपोर्ट तक लाया जाता है.
इसके बाद उन्हें तापमान नियंत्रित गोदामों में रखा जाता है, जहां तापमान लगभग 15 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच बनाए रखा जाता है. फिर उन्हें विशेष कंटेनरों में विमान के जरिए विदेश भेजा जाता है.
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आम ग्राहकों तक पहुंचने तक पूरी तरह ताजे और सुरक्षित रहें.
एयर इंडिया के पास भारत और विदेशों के 14 प्रमुख हवाई अड्डों पर आधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं मौजूद हैं. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लंदन, फ्रैंकफर्ट और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में विशेष तापमान नियंत्रित सुविधाएं बनाई गई हैं.
इसके अलावा कूल डॉली, थर्मल ब्लैंकेट और विशेष कंटेनरों का उपयोग किया जाता है ताकि विमान में चढ़ाने और उतारने के दौरान भी आमों का तापमान स्थिर बना रहे.
भारतीय आमों की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिल रहा है. जब आम विदेशों में अच्छे दामों पर बिकते हैं, तो किसानों की आय भी बढ़ती है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं.
साथ ही भारत के कृषि उत्पादों की पहचान अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत हो रही है. इससे अन्य फलों और कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए भी नए रास्ते खुल रहे हैं.
आज भारतीय आम सिर्फ एक फल नहीं बल्कि भारत की पहचान बन चुके हैं. एयर इंडिया की "मैंगो एक्सप्रेस" जैसी पहल के जरिए भारत का स्वाद, खुशबू और संस्कृति दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंच रही है.
हर साल लाखों लोग भारतीय अल्फांसो और केसर आमों का इंतजार करते हैं. यह न केवल किसानों के लिए अच्छी खबर है, बल्कि भारत के कृषि निर्यात को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला कदम साबित हो रहा है. आने वाले वर्षों में भारतीय आमों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे भारत का "फलों का राजा" पूरी दुनिया में अपना जलवा बिखेरता रहेगा.
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