अल नीनो का खतराआंध्र प्रदेश में अल नीनो का संकट गहराने लगा है. ऐसे में सरकार ने राज्य के किसानों से इस खरीफ सीजन में धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों की बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें उगाने की अपील की है. सरकार का कहना है कि इस साल अल नीनो का असर गंभीर हो सकता है और अगस्त के बाद मॉनसून की स्थिति और कमजोर पड़ने की आशंका है. ऐसे में अगर किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं तो बाद में सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है. यह फैसला मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया. बैठक में अल नीनो के संभावित प्रभाव, बारिश की स्थिति और किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई.
राज्य के सूचना और जनसंपर्क मंत्री के. पार्थसारथी ने बताया कि इस साल आंध्र प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी संकेत दिया है कि अगस्त के बाद मॉनसून का दूसरा चरण पहले से ज्यादा कमजोर रह सकता है. ऐसे में पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने की पूरी संभावना है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान अभी से अपनी फसल का चयन सोच-समझकर करें. अगर सभी किसान धान की खेती करेंगे और बाद में पानी की कमी हो गई, तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे धान की जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करें. कृषि विभाग किसानों को वैकल्पिक फसलों की जानकारी देगा और उन्हें तकनीकी सलाह भी उपलब्ध कराई जाएगी. मंत्री के. पार्थसारथी ने कहा कि सरकार किसानों को अकेला नहीं छोड़ेगी. कृषि विभाग हर स्तर पर किसानों की मदद करेगा और जरूरत के अनुसार कम पानी वाली फसलों के बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
सरकार ने बताया कि मॉनसून के बाद कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए हजारों बीज किट तैयार किए जा रहे हैं. इन किटों में अलग-अलग वैकल्पिक फसलों के बीज होंगे, जिन्हें किसानों के बीच बांटा जाएगा. इससे किसान बदलते मौसम के अनुसार, खेती कर सकेंगे और नुकसान का खतरा भी कम होगा.
सरकार ने किसानों को बिना जरुरत के नए बोरवेल नहीं खोदने की भी सलाह दी है. अधिकारियों के अनुसार, यदि बारिश कम रही तो भूजल स्तर और नीचे जा सकता है. ऐसे में भूजल का अत्यधिक दोहन भविष्य में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए संकट पैदा कर सकता है. मंत्री ने बताया कि इस समय तक गोदावरी नदी में पोलावरम परियोजना के पास सामान्य रूप से लगभग एक लाख क्यूसेक पानी आना चाहिए था, लेकिन इस बार केवल 38 हजार क्यूसेक पानी ही दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि जल उपलब्धता पहले की तुलना में काफी कम है.
सरकार के मुताबिक गोदावरी और कृष्णा डेल्टा क्षेत्रों में खरीफ सीजन की लगभग 70 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है. हालांकि, बाकी किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए फसल का चयन करें और अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों से बचें. मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश की लगभग 59 प्रतिशत खेती सिंचाई परियोजनाओं पर निर्भर है, जबकि 41 प्रतिशत खेती पूरी तरह बारिश पर आधारित है. यदि बारिश की कमी जारी रहती है तो सरकार जरूरत पड़ने पर टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की भी तैयारी कर रही है.
कैबिनेट बैठक में कृषि के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई. बापटला जिले के वेदुल्लापल्ली गांव में श्रवण बाधित विद्यार्थियों के लिए 30 सीटों वाला डिग्री कॉलेज खोला जाएगा. इसके अलावा 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करलु के लिए 50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनका उपयोग सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर किया जाएगा. वहीं, कृषि विपणन संस्था APMARKFED के लिए 300 करोड़ रुपये के टर्म लोन पर सरकारी गारंटी देने का फैसला भी लिया गया. इसके अलावा चित्तूर जिले में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. सरकार का कहना है कि बदलते मौसम और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए समय रहते सही फसल का चयन करना ही किसानों के हित में होगा. इससे पानी की बचत होगी और खेती में नुकसान की संभावना भी कम होगी. (PTI)
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