बिहार विधानसभा में उठा जहरीली सब्जियों का मुद्दा (फाइल फोटो)बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन लोगों की सेहत से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सदन में गूंजा. पूर्व कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने आरोप लगाया कि राजधानी पटना और उसके आसपास के कई इलाकों में सब्जियों की सिंचाई नालों के गंदे पानी से की जा रही है. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सब्जियों में जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है. उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
सदन में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा से सवाल करते हुए कुमार सर्वजीत ने दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया की एक अध्ययन रिपोर्ट का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में सब्जियों में सीसा (Lead) और कैडमियम (Cadmium) जैसे जहरीले तत्व मिलने की बात सामने आई है. उनका कहना था कि नालों के दूषित पानी से उगाई गई सब्जियां सीधे लोगों की थाली तक पहुंच रही हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस समस्या को लेकर पूरी तरह गंभीर और सतर्क है. उन्होंने बताया कि दूषित पानी से सिंचाई, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अनियंत्रित इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए राज्य और केंद्र सरकार मिलकर कई कदम उठा रही हैं. सरकार किसानों को सुरक्षित खेती के लिए जागरूक करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है.
बहस के दौरान कुमार सर्वजीत ने दावा किया कि कुछ जगहों पर अधिक मुनाफा कमाने के लिए सब्जियों में इंजेक्शन और रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शाम तक छोटा दिखने वाला कद्दू रात में इंजेक्शन लगाने के बाद सुबह बड़ा दिखाई देने लगता है. उनका आरोप था कि ऐसे तरीके लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हैं और इन्हें रोकने के लिए सरकार को सख्त निगरानी करनी चाहिए.
पूर्व कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि कई किसानों को कीटनाशक और रासायनिक दवाओं के सही इस्तेमाल की जानकारी नहीं होती. कई बार दवा विक्रेता जरूरत से ज्यादा दवाएं इस्तेमाल करने की सलाह दे देते हैं. इससे फसल पर रसायनों का असर बढ़ जाता है और सब्जियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं. उन्होंने किसानों को सही तकनीकी सलाह देने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की.
कुमार सर्वजीत ने कहा कि उनके कार्यकाल में किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए प्रखंड स्तर पर कृषि क्लीनिक शुरू करने का फैसला लिया गया था. उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था को फिर से प्रभावी बनाने और निगरानी समितियों को मजबूत करने की मांग की, ताकि किसान जरूरत से ज्यादा कीटनाशकों का इस्तेमाल न करें और सुरक्षित खेती को बढ़ावा मिले.
कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि सरकार राज्य में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है. परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 30.60 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है, जिसके माध्यम से बिहार के सभी 38 जिलों में 30 हजार हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती कराई जाएगी. वहीं, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत वर्ष 2025-26 के लिए 25 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 के लिए 10.30 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और किसानों से अपील की कि वे अपनी कृषि भूमि के कम से कम एक-तिहाई हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं और 'खेत बचाओ अभियान' को जन आंदोलन बनाएं.
सदन में कृषि मंत्री ने बताया कि एग्री स्टैक अभियान के तहत किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है. इसका उद्देश्य भूमि विवाद कम करना, कृषि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और किसानों को खाद, बीज, सब्सिडी तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उपलब्ध कराना है. सरकार का कहना है कि तकनीक और आधुनिक कृषि व्यवस्था के जरिए बिहार के किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जाएगा.
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