किसान ने उजाड़ दी पूरी फसलकर्नाटक के कोलार जिले से किसानों की बदहाली की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. यहां एक किसान ने अपनी मेहनत से तैयार की गई टमाटर की पूरी फसल खुद ही नष्ट कर दी है. वजह यह रही कि बाजार में टमाटर की कीमतें इतनी नीचे आ गईं कि फसल बेचने पर लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है. मजबूरी में किसान ने खेत में खड़ी फसल को उखाड़ दिया. यह मामला कोलार तालुक के थोतली गांव के किसान नारायणस्वामी का है.
नारायणस्वामी ने करीब 25 गुंटा जमीन पर टमाटर की खेती की थी. फसल तैयार होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी कीमत मिलेगी और उनकी मेहनत रंग लाएगी. लेकिन बाजार में टमाटर की कीमतें अचानक गिरकर 15 किलो के एक बॉक्स के सिर्फ 50 से 100 रुपये रह गईं. इतनी कम कीमत मिलने से फसल की तुड़ाई और मजदूरी का खर्च निकालना भी संभव नहीं था.
किसान नारायणस्वामी ने बताया कि उन्होंने इस फसल पर करीब 1.20 लाख रुपये खर्च किए थे. इसमें बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी जैसी सभी लागत शामिल थी. लेकिन अब तक उन्हें फसल बेचकर केवल करीब 10 हजार रुपये ही मिल पाए हैं. यानी पूरे लागत का एक छोटा हिस्सा भी वापस नहीं आ सका. उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं, लेकिन पहले कभी कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट नहीं देखी. उनके अनुसार, पौधों पर अभी भी अच्छी मात्रा में टमाटर लगे हुए हैं, लेकिन उन्हें तोड़ने का भी कोई फायदा नहीं है. क्योंकि बाजार तक पहुंचाने, मजदूर लगाने और परिवहन का खर्च भी नहीं निकल पाएगा. ऐसे में उन्होंने पूरी फसल नष्ट करने का कठिन फैसला लिया.
नारायणस्वामी ने बताया कि उनके पास खेती के लिए कोई दूसरी जमीन भी नहीं है. यही फसल उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत थी. अब फसल बर्बाद होने के बाद उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि जब किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पाता, तब उसके पास फसल नष्ट करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता.
यह घटना केवल एक किसान की नहीं, बल्कि उन हजारों टमाटर उत्पादक किसानों की समस्या को उजागर करती है, जो उत्पादन बढ़ने और बाजार में कीमतें गिरने के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं. किसानों का कहना है कि सरकार को ऐसी स्थिति में फसलों के दाम स्थिर रखने की व्यवस्था, खरीद व्यवस्था और प्रसंस्करण जैसी योजनाओं को मजबूत करना चाहिए, ताकि किसानों को अपनी मेहनत की उचित कीमत मिल सके और उन्हें इस तरह की मजबूरी का सामना न करना पड़े. (सगाय राज की रिपोर्ट)
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