भारत में लॉन्च हुआ 'ई85' सुपर फ्यूल (AI- तस्वीर)विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के मौके पर भारत ने ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में इंडियन ऑयल के एक पेट्रोल पंप पर देश का पहला 'ई85' (E85) ईंधन लॉन्च किया.. ई85 कोई साधारण ईंधन नहीं है, बल्कि यह एक हाई-इथेनॉल मिक्स्ड फ्यूल है, जिसमें 80 से 85 परसेंट तक इथेनॉल और 14 से 19 परसेंट तक पेट्रोल मिलाया जाता है. इसे खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए बनाया गया है, जो ई20 से लेकर ई100 तक के किसी भी इथेनॉल मिक्स पर आराम से चल सकते हैं. इस नई शुरुआत से गाड़ी चलाने वालों को अब केवल एक तरह के ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
इस पर्यावरण-अनुकूल पहल की शुरुआत देश भर में सरकारी तेल कंपनियों के 48 पेट्रोल पंपों से की जा रही है, ताकि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी रखने वाले लोगों को तुरंत यह स्वच्छ और सस्ता ईंधन मिल सके. सरकार ने इसके विस्तार की एक बहुत बड़ी योजना बनाई है, जिसके तहत दिसंबर 2026 तक ई85 आउटलेट्स की संख्या बढ़ाकर 500 और दिसंबर 2027 तक करीब 5000 कर दी जाएगी, जिससे साल 2030-31 तक देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग का कुल स्तर लगभग 26 परसेंट तक पहुंच जाएगा.
हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि इस नए ईंधन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी कीमत को नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम रखा गया है. सरकार का सीधा मकसद यह है कि देश में बने इथेनॉल का आर्थिक फायदा सीधे आम जनता की जेब तक पहुंचे. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि साल 2014 में हमारे देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ 1.53 परसेंट थी, जो आज बढ़कर पूरे 20 परसेंट हो चुकी है. भारत ने यह बड़ा टारगेट अपने तय समय से पूरे पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है. इस बड़े बदलाव के कारण देश को 1.84 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है और लगभग 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का इम्पोर्ट (आयात) कम हुआ है.
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने कहा ई85 ईंधन की असली ताकत यह है कि इसके लिए हमें किसी दूसरे देश से तेल या विदेशी खनिजों को मंगाने की जरूरत नहीं है. यह पूरी तरह से भारत की उपज है और इससे भारत की ही प्रगति होगी. यह इथेनॉल हमारे देश के किसानों की कड़ी मेहनत और पसीने से तैयार होता है, जिससे भारत के किसान अब 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' भी बन गए हैं. अगर देश के आधे नए दोपहिया और चार-पहिया वाहन फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी पर आ जाते हैं, तो इससे मार्केट में 312 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल की डिमांड पैदा होगी. इसका सीधा फायदा हमारे किसानों को मिलेगा और उनके पास सीधे तौर पर लगभग 12,403 करोड़ रुपये पहुंचेंगे. साथ ही, हर साल करीब 15,151 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी.
तकनीकी रूप से भी ई85 ईंधन बहुत शानदार है. ई85 पर चलने वाली गाड़ियां नॉर्मल पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में ग्रीनहाउस गैसों के एमिशन को लगभग 61 परसेंट तक कम कर सकती हैं. इसका रिसर्च ऑक्टेन नंबर करीब 108 है, जिसकी वजह से इंजन को बेहतर नॉक रेजिस्टेंस मिलता है और गाड़ियां ज्यादा कम्प्रेशन रेश्यो पर भी बहुत स्मूथ चलती हैं. यह ईंधन इंजन के अंदर पूरी तरह से जलता है, जिससे साइलेंसर से निकलने वालाधुआं और प्रदूषण कण लगभग जीरो हो जाता है और शहरों की हवा साफ होती है. भारत की यह फ्लेक्स-फ्यूल यात्रा ब्राजील की वैश्विक सफलता से प्रेरित है, जहां आज 80 परसेंट से ज्यादा गाड़ियां इसी टेक्नोलॉजी पर चल रही हैं.
केंद्रीय मंत्री ने यह भी साफ किया कि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के मुकाबले काफी सस्ती और किफायती हैं. ईवी को खरीदने का खर्च बहुत ज्यादा होता है और उसकी तकनीक काफी हद तक विदेशी बैटरी और खनिजों पर निर्भर करती है, जबकि फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां हमारे देश के मौजूदा पेट्रोल पंप नेटवर्क का ही इस्तेमाल कर सकती हैं. ईंधन से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि ई85 केवल विशेष रूप से बनी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए है, इसे नॉर्मल पेट्रोल गाड़ियों में न डालें. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब से देश में ई20 मानक ईंधन बना है, तब से इथेनॉल की वजह से एक भी इंजन खराब होने का मामला सामने नहीं आया है. इससे गाड़ियों का पिकअप बेहतर होता है और गाड़ी के इंश्योरेंस पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता. ई85 की हर बूंद 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच कर रही.
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