आम किसानों को मिलेगी राहततोतापुरी आम की खेती करने वाले किसानों को लगातार हो रहे नुकसान और मंडियों में गिरते दाम की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुधार की योजना तैयार की है. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के आम उत्पादकों की परेशानी दूर करने के लिए कृषि मंत्रालय ने तोतापुरी आम की खेती से लेकर बिक्री तक पूरी व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया है.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सिर्फ रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाने होंगे.
तोतापुरी आम की कीमतों में इस साल आई गिरावट के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी. इस समिति में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), राज्य सरकारों के उद्यानिकी विभाग और कृषि विशेषज्ञों को शामिल किया गया था.
समिति ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों में जाकर किसानों, मंडी व्यापारियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), आम पल्प बनाने वाली फैक्ट्रियों और निर्यातकों से बातचीत की. इसके बाद तोतापुरी आम की पूरी व्यवस्था यानी खेत से लेकर बाजार तक की समस्याओं का अध्ययन किया गया.
समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि तोतापुरी आम की कीमत गिरने की बड़ी वजह खरीद व्यवस्था में तालमेल की कमी है. आम का सीजन शुरू होने पर कई बार प्रोसेसिंग कंपनियां समय पर खरीद शुरू नहीं कर पाती हैं.
वहीं दूसरी ओर किसान एक साथ बड़ी मात्रा में आम मंडियों और फैक्ट्रियों तक पहुंचा देते हैं. इससे बाजार में आम की आवक बढ़ जाती है और कीमतें अचानक गिर जाती हैं. इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है.
इसके अलावा आम से बनने वाले पेय पदार्थों में कम मात्रा में असली आम का गूदा इस्तेमाल होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव को भी कीमत गिरने का कारण बताया गया है.
विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि आम से बनने वाले पेय पदार्थों में असली आम के गूदे की मात्रा बढ़ाई जानी चाहिए. समिति ने सुझाव दिया कि ऐसे पेय पदार्थों में करीब 22 से 25 प्रतिशत तक प्राकृतिक आम का गूदा होना चाहिए. समिति का मानना है कि इससे तोतापुरी आम के गूदे की मांग बढ़ेगी और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है. इसके साथ ही ज्यादा गूदे वाले पेय पदार्थों को कम जीएसटी दर का लाभ देने पर भी विचार किया जा रहा है. इस मामले पर खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI), वित्त मंत्रालय, जीएसटी परिषद, खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के बीच चर्चा की जाएगी.
किसानों को बार-बार कीमत गिरने की समस्या से बचाने के लिए एक केंद्रीय समन्वय और मूल्य स्थिरीकरण समिति बनाने की सिफारिश की गई है. यह समिति हर साल आम सीजन शुरू होने से पहले फसल उत्पादन, बाजार की मांग, प्रोसेसिंग क्षमता और निर्यात की स्थिति की समीक्षा करेगी. इसके आधार पर किसानों के लिए उचित खरीद मूल्य और आम पल्प की कीमत तय करने में मदद मिलेगी. इससे किसानों और प्रोसेसिंग कंपनियों दोनों को पहले से बाजार की स्थिति का अंदाजा मिल सकेगा.
आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में बड़ी संख्या में पुराने आम के बाग हैं. इन पुराने पेड़ों में उत्पादन और फल की गुणवत्ता दोनों कम हो रही हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने टॉप वर्किंग तकनीक अपनाने का सुझाव दिया है. इसके तहत पुराने पेड़ों पर बेहतर किस्मों की कलम लगाकर कम समय में अच्छी गुणवत्ता वाले आम तैयार किए जा सकेंगे. इससे किसान अपनी जमीन पर ही ज्यादा कीमत वाली आम की किस्में उगा सकेंगे और उनकी आय बढ़ सकती है.
सरकार ने तोतापुरी आम उत्पादकों को बेहतर खेती के लिए प्रशिक्षण देने और अच्छी कृषि पद्धतियां (GAP) अपनाने पर भी जोर दिया है. इसके तहत किसानों को आधुनिक तकनीक, बाग प्रबंधन, फल की गुणवत्ता सुधारने और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने की जानकारी दी जाएगी.
समिति ने सुझाव दिया है कि चित्तूर, तिरुपति, अन्नमय्या और कडप्पा जिलों में करीब 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में फ्रूट बैग उपलब्ध कराए जाएं. फ्रूट बैग लगाने से फलों को कीटों से बचाने में मदद मिलेगी और आम की बाहरी गुणवत्ता बेहतर होगी. इससे किसानों को बड़े बाजारों में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.
सरकार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के जरिए किसानों को प्रोसेसिंग से जोड़ने की योजना पर भी काम कर रही है. इसके तहत आम से बनने वाले उत्पादों जैसे पल्प, मैंगो बटर और अन्य वैल्यू एडेड प्रोडक्ट तैयार किए जाएंगे. आम के बीज से भी नए उत्पाद बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल सके.
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