प्राकृतिक खेती (सांकेतिक तस्वीर)देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत अब तक 20.92 लाख से अधिक किसानों को जोड़ा जा चुका है. वहीं 10.32 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है. यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से दी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कम लागत वाली कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है. इस मिशन के तहत देशभर में 18,893 क्लस्टर बनाए गए हैं, जिनके माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए ट्रेनिंग और तकनीकी मदद दी जा रही है.
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 नवंबर 2024 को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंजूरी दी थी. इस योजना का उद्देश्य देशभर में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है. प्राकृतिक खेती में पशुधन आधारित कृषि पद्धतियों, भारतीय पारंपरिक ज्ञान और विविध फसल प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया जाता है. सरकार का कहना है कि इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है, जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने की क्षमता बढ़ती है और किसानों की खेती की लागत घटाने में मदद मिलती है.
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत सबसे अधिक 5,002 क्लस्टर आंध्र प्रदेश में बनाए गए हैं. इसके बाद राजस्थान में 2,380, उत्तर प्रदेश में 1,857, मध्य प्रदेश में 1,805 और महाराष्ट्र में 1,711 क्लस्टर गठित किए गए हैं. किसानों के रजिस्ट्रेशन के मामले में भी आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां 6.50 लाख (6,50,163) से अधिक किसान मिशन से जुड़े हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 2.30 लाख, राजस्थान में 2.12 लाख, मध्य प्रदेश में 1.67 लाख और महाराष्ट्र में 1.43 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण हुआ है.
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर मिशन के तहत 10,32,116.452 (10.32 लाख) हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है. सबसे ज्यादा 4,25,912.564 (4.25 लाख) हेक्टेयर क्षेत्र आंध्र प्रदेश में प्राकृतिक खेती के तहत शामिल किया गया है. इसके बाद राजस्थान में 91,165.58 हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 90,902.256 हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 83,166.90 हेक्टेयर और कर्नाटक में 54,456.80 हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय और 194 स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थानों को जोड़ा है. इसके अलावा 18 प्राकृतिक कृषि उत्कृष्टता केंद्र भी चिन्हित किए गए हैं, जहां वैज्ञानिकों, राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों और किसान मास्टर प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाती है. अब तक 33,257 कृषि सखियों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (CRPs) को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो गांव स्तर पर किसानों का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
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