प्रतीकात्मक तस्वीर.अक्सर गेहूं-चावल से जुड़ी कुछ हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आती हैं. तस्वीरों में देखने को मिलता है कि खुले में पड़ा गेहूं-चावल पानी में भीग कर खराब हो रहा है. ऐसा नहीं है कि इस तरह की तस्वीरें किसी एक-दो राज्यों से ही आती हैं. कभी पंजाब-हरियाणा तो कभी यूपी और मध्य प्रदेश से इस तरह की तस्वीर आती हैं जिसमे खुले में पड़ा गेहूं-चावल या तो पानी में भीग रहा होता है या खुले में पड़े-पड़े सड़ रहा होता है. कई बार तो ऐसी तस्वीर भी आती है जिसमे दिखाया जाता है कि बड़ी संख्या में पक्षी खुले में पड़े अनाज को खा रहे होते हैं.
जबकि हकीकत ये है कि देश में किसानों से खरीदे जाने वाले अनाज को स्टोर करने के लिए 2574 गोदामों की भारी-भरकम संख्या है. इसमे फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई), स्टेट वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन, सेंट्रल वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन, प्राइवेट एंटरप्रेन्योर गारंटी (पीईजी) और अन्य के गोदाम शामिल हैं. ऐसा भी नहीं है कि ये गोदाम फौरन ही भर जाते हैं. अगर पीईजी को छोड़ दें तो बाकी के गोदाम 20 से 40 फीसद तक खाली रहते हैं.
देश में गेहूं-चावल, मोटे अनाज और दाल की खरीद की जाती है. सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अनाज की खरीद करती है. इस अनाज को खासतौर पर चार तरह के गोदामों में रखा जाता है. अगर इस तरह के गोदामों की संख्या की बात करें तो देश में कुल गोदामों की संख्या 2574 है. जिसमे एफसीआई के पास 569, सीडब्ल्यूसी के पास 192, एसडब्ल्यूसी 1119, पीईजी 399 और अन्य के पास 295 गोदाम हैं.
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की एजेंसी एफसीआई की बेवसाइड पर दी गई जानकारी के मुताबिक देशभर के 2574 गोदामों में करीब 5 करोड़ मीट्रिक टन अनाज को स्टोर करने की क्षमता है. बेवसाइड पर दी गई जानकारी के मुताबिक एफसीआई के गोदाम में 1.51 करोड़ मीट्रिक टन अनाज स्टोरेज की क्षमता है. सीडब्ल्यूसी में 43 लाख टन, एसडब्ल्यूसी में 1.83 करोड़ टन, पीईजी में एक करोड़ टन और अन्य के गोदामों में 66.42 लाख टन अनाज स्टोरेज की क्षमता है.
बेवसाइड पर दी गई जानकारी के मुताबिक 30 अप्रैल 2026 तक ये बताया गया है कि किस एजेंसी का गोदाम कितने फीसद तक इस्तेमाल हो चुका है. अगर प्राइवेट गोदामों को छोड़ दें तो सरकारी और अन्य के गोदाम इस्तेमाल होने के बाद भी करीब 20 से 40 फीसद तक खाली पड़े हुए हैं. एफसीआई के गोदाम 75 फीसद तक इस्तेमाल हुए हैं. सीडब्ल्यूसी के 80, एसडब्ल्यूसी के 74 फीसद, पीईजी के 96 फीसद और अन्य के 62 फीसद तक ही गोदाम इस्तेमाल हुए.
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