मिलावटी दूध की जांच (AI- तस्वीर)पशुओं की थनैला बीमारी जानलेवा तो है ही, साथ में इसका इलाज भी बहुत खर्चीला है. शायद इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि थनैला का इलाज से बेहतर बचाव है. और पशुओं को थनैला बीमारी से बचाने के एक नहीं कई तरीके हैं. लेकिन बचाव के साथ ही उससे ज्यादा जरूरी ये है कि जब पशु में थनैला के लक्षण दिखाई दें तो उसकी जांच कराएं और दूध के सैम्पल को लैब में भेजें. लेकिन सैम्पल कैसे लिया जाए, सैम्पल लेने का तरीका कैसा होना चाहिए ये जानना भी बहुत जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं में थनैला बीमारी के लक्षण उनके दूध में ज्यादा दिखाई देते हैं.
साथ ही एक-दो लक्षण पशुओं के थन में भी दिखाई देते हैं. एक्सपर्ट की मानें तो थनैला बीमारी मौसमी संक्रमण से कम और पशुपालक की ओर से साफ-सफाई रखने में होने वाली लापरवाही के चलते ज्यादा होती है. जब भी पशुपालक पशुओं का दूध दुहाने के दौरान सफाई नहीं बरतते हैं तो थनैला होने की आशंका बढ़ जाती है.
लाला लाजपत राय पशु-चिकित्सा एवं पशु-विज्ञान यूनिवर्सिटी (लुवास), हिसार की ओर से थनैला के प्रति पशुपालकों को जागरुक किया जा रहा है. हाल ही में महेन्द्रगढ़, हरियाणा में एक जागरुकता कैम्प लगाया गया था. जहां पशुपालकों को खासतौर पर ये बताया गया कि जब थनैला बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो लैब में जांच के लिए उसका सैम्पल कैसे लिया जाए. एनिमल एक्सपर्ट और पशु चिकित्सक डॉ. अंबिका ने बताया कि लैब में सैंपल देने का सही तरीका ये है कि लैब में दूध के सैंपल देने के लिए चार नई पैकेट में सील सिरिंज खरीदे.
थनों को अच्छे से साफ करें. अपने हाथो को अच्छे से साबुन से धोयें. सिरिंज के पैकेट को खोलकर पीछे से प्लंजर निकाले. इसके बाद अलग-अलग थनों से बीच की धार के दूध का सैंपल अलग अलग सिरिंज में सीधे भरे और सिरिंज को बंद कर दे. ख्याल रहे कि दूध का सैंपल थनों से सीधे सिरिंज में डालना है.
एनिमल एक्सपर्ट ने बताया कि पशुओं का दूध निकालने से पहले साफ-सफाई बरतना जरूरी है. जैसे दूध निकालने जा रहे हैं तो सबसे पहले अपने हाथो को अच्छी तरह से साबुन से धोएं. थनों को अच्छे से साफ करें और गीले थनों को सूखे कपडे से पोंछे और उसके बाद ही दूध निकालें. इतना ही नहीं दूध का बर्तन साफ होना चाहिए, बर्तन कीटाणु रहित होना चाहिए. दूध निकालने के बाद पशु के थनों को साफ करें.
थनों पर लाल दवाई के घोल का स्प्रे करें. साइंटिस्ट का कहना है कि कोशिश करें कि दूध निकालने के आधे घंटे बाद तक पशु नीचे जमीन पर ना बैठने दे. साथ ही पशु में अगर थनैला के कोई भी लक्षण जैसे अचानक दूध कम हो जाना, थानों में दर्द, सूजन, थन का सूख जाना, दूध में छिछड़े, गिट, दूध में खून, मवाद, पानी आए तो दूध को जांच के लिए फौरन ही लैब में जांच के लिए भेज दें.
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