डेयरी से अधिक कमाई की टिप्सगाय-भैंस पालन में पानी का बड़ा ही अहम रोल है. पशुओं को प्यास लगे तो पानी चाहिए और अगर दूध दे रहे हैं तो पानी और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो दूध में 85 फीसद मात्रा पानी की होती है. इसलिए भी गाय-भैंस को हर मौसम में पानी की ज्यादा जरूरत रहती है. और अगर मौजूदा मौसम की बात करें तो ऐसे में कोशिश यही होनी चाहिए कि पशुओं के शरीर में पानी की कमी न हो. क्योंकि पानी की कमी के चलते पशु डिहाइड्रेशन समेत हीट स्ट्रैस की चपेट में आ जाता है. जिसके चलते उत्पादन भी घट जाता है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर गर्मियों के दौरान पशुओं की खुराक में हरे चारे की मात्रा भरपूर रखी जाए तो एक किलो हरे चारे से तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है. वहीं दूसरी ओर पशुपालकों ने एक्सपर्ट के बताय ये 10 टिप्स का पालन किया तो फिर गर्मियों के दौरान पशुओं के शरीर में पानी की कमी नहीं होगी.
जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.
पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.
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