Foot-Mouth Disease: देशभर में चल रही है FMD वैक्सीनेशन ड्राइव, ये है पहचान और बचाव का तरीका 

Foot-Mouth Disease: देशभर में चल रही है FMD वैक्सीनेशन ड्राइव, ये है पहचान और बचाव का तरीका 

Foot-Mouth Disease खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी वायरस से होने वाली बीमारी है तो इसके सक्रिय होने और फैलने का भी कोई तय वक्त नहीं है. इसी को देखते हुए केन्द्र सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नौ राज्यों में एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी में लगी हुई है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये मिलेगा कि एफएमडी बीमारी के चलते मीट, डेयरी प्रोडक्ट‍ और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट दूर हो जाएगी. 

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Foot-Mouth Disease: देशभर में चल रही है FMD वैक्सीनेशन ड्राइव, ये है पहचान और बचाव का तरीका भैंस की टॉप 4 नस्लें

ऐसे पशु जिनके पैरों में खुर हैं और दो खुर के बीच में अंतर (गैप) है तो उनके लिए खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी बहुत खतरनाक मानी जाती है. ये पशुओं के लिए जानलेवा बीमारी तो है ही, साथ में उत्पादन पर भी असर डालती है. गाय-भैंस, भेड़-बकरी आदि पशु इसकी चपेट में जल्दी और ज्यादा होते हैं. एफएमडी बीमारी देश ही नहीं विदेशों में भी डेयरी और पशुपालन सेक्टर के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. एफएमडी से निपटने के लिए देश में अगले चरण की एफएमडी वैक्सीनेशन (टीकाकरण) ड्राइव शुरू हो गई है. 

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कुछ राज्य ऐसे हैं जहां वैक्सीनेशन का छठा चरण चल रहा है, वहीं कई राज्य ऐसे भी हैं जहां सातवां और आठवां दौर चल रहा है. एक्स्पर्ट का कहना है कि एफएमडी बीमारी की रोकथाम के लिए ये जरूरी है कि हमे उसके लक्षण पता हों. साथ ही उसके फैलने की वजह पता हों जिससे उन्हें कंट्रोल किया जा सके. साथ ही अगर किसी पशु को ये बीमारी हो जाए तो उस वक्त क्या करना चाहिए इस बात की जानकारी भी होना बहुत जरूरी है. 

इन लक्षणों से पहचानें एफएमडी 

एनिमल एक्सपर्ट डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि एफएमडी दुधारू पशु गाय-भैंस, भेड़-बकरी में तो होती है साथ में घोड़े जैसे पशुओं में भी होती है. इसीलिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है. क्योंकि जैसे ही आप लक्षण पहचान लेंगे तो उसे फैलने से रोकने के लिए जरूरी उपाय भी अपना लेंगे. 

  • पशु को 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. 
  • एफएमडी पीडि़त पशु की भूख कम हो जाएगी. 
  • एफएमडी से पीडि़त पशु सुस्त रहने लगता है. 
  • पशु के मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. 
  • मुंहपका हो जाते हैं अंदर और बाहर फफोले हो जाते हैं. 
  • खासतौर पर पशु के जीभ-मसूड़ों पर फफोले हो जाते हैं. 
  • पशु के पैर में खुर के बीच वाली जगह में घाव हो जाते हैं. 
  • अगर पशु गाभिन है तो उसका गर्भपात हो जाता है. 
  • पशु के थन में सूजन आने से दूध देने में परेशानी होती है.
  • एफएमडी पशु में बांझपन की बीमारी की वजह भी है. 

ऐसे फैलती है एफएमडी     

  • बरसात के दौरान दूषित चारा और दूषित पानी पीने से. 
  • बरसात के दौरान खुले में चरने से भी फैलता है. 
  • खुले में पड़ी सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. 
  • फार्म पर आने वाला नया पशु पीडि़त है तो उससे लग जाती है. 
  • एफएमडी पीड़ित पशु के साथ रहने से हो जाती है. 

एफएमडी की रोकथाम के उपाय 

डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि बहुत आसान तरीकों से पशुओं में एफएमडी की रोकथाम की जा सकती है. ये वो उपाय हैं जिसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. 

  • पशु पीडि़त हो या नहीं उसका रजिस्ट्रेशन कराएं. 
  • पशु की ईयर टैगिंग जरूर करवाएं. 
  • पशु को साल में दो बार एफएमडी का टीका लगवाएं. 
  • सभी सरकारी केन्द्र पर टीका फ्री लगाया जाता है. 
  • पशु के बैठने-खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

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