Water for Animal: पशुओं में न होने दें पीने के पानी की कमी है, ऐसे करें पहचान

Water for Animal: पशुओं में न होने दें पीने के पानी की कमी है, ऐसे करें पहचान

Water for Animal एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं को सबसे बड़ी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रैस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है. वहीं एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि गर्मियों के दौरान पशुओं को हरा चारा खूब खि‍लाना चाहिए. एक किलो हरे चारे से पशु में तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है. 

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मई की शुरुआत हो चुकी है. गर्मी और तापमान दोनों ही अप्रैल से अपना रूप दिखाने लगे हैं. बीते महीने ही पारा कहीं 40 तो कहीं 43 डिग्री पहुंच चुका है. दो दिन से बारिश और ओले गिरने के चलते मौसम ठंडा है. लेकिन ये ज्यादा दिन तक नहीं चलेगा. गर्मी और तापमान दोनों ही अपना असर दिखाएंगे. ऐसे में इंसान ही नहीं पशुओं के लिए भी पीने का पानी बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है. पानी की कमी के चलते जहां बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, वहीं ये कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो जाता है. इसलिए पशुओं यानि गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी सभी को दिन में कई-कई बार पानी पिलाते रहें.

साथ ही बाड़े में पशुओं की देखभाल के दौरान गाय-भैंस में होने वाली पानी की कमी की भी पहचान करते रहें. लक्षण दिखाई देते ही उपाय शुरू कर दें. गर्मी में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर किस तरह की परेशानी हो सकती है, उसके लक्षण क्या हैं और परेशानी होने पर किस तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है. 

पशुओं में पानी की कमी को ऐसे पहचानें 

जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

पानी कम पिलाने से ये होती हैं परेशानियां 

पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.

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