Ranchi-Jharkhand-6.12.18-Harsh Thakar , Abhinav Singh,Rakesh Sharma and Abishek Raj the owners of the milk factory of the well known company Osam Milk at the working sight of the milk factory at Patrato in Ranchi. Photo By--Somnath Senकेरल का सहकारी मिल्क फेडरेशन Milma ने दूध की कीमतें 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन तुरंत राहत का इंतजार कर रहे डेयरी किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि कोऑपरेटिव ने इसे लागू करने की तारीख अभी तय नहीं की है.
मिल्मा के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने बुधवार को अपनी बैठक में इस बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी, और उस सिफारिश को औपचारिक रूप दे दिया जिसे सरकार ने हाल ही में मंजूरी दी थी. हालांकि, Milma के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के.एस. मणि ने कहा कि इसे लागू करने की सही तारीख तभी तय की जाएगी जब मौजूदा चुनाव आचार संहिता खत्म हो जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि नई सरकार के तहत आने वाली नई गवर्निंग बॉडी ही इस पर अंतिम फैसला लेगी.
दूध के दाम में अभी राहत नहीं मिलने पर एर्नाकुलम रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन के सदस्यों ने नाराजगी जाहिर की, जो इसे तुरंत लागू करने की मांग कर रहे थे. उन्होंने विरोध जताते हुए बोर्ड की बैठक से वॉकआउट कर दिया.
यह फैसला Milma और सरकार के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद आया है. कोऑपरेटिव ने शुरू में 4 से 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग की थी, और रीजनल यूनियनों ने यह तर्क दिया था कि पशुओं के चारे, मजदूरी और जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ गर्मियों में दूध के उत्पादन में आई गिरावट ने डेयरी किसानों को एक गंभीर संकट में डाल दिया है.
सरकार ने शुरू में चुनाव के समय का हवाला देते हुए इस बढ़ोतरी को रोक दिया था, जिससे जनता में विरोध भड़क उठा. इसमें एर्नाकुलम रीजनल यूनियन द्वारा Milma के मुख्यालय पर किया गया प्रदर्शन भी शामिल था. आखिरकार, लगातार दबाव के बाद सरकार मान गई और उसने इसकी अनुमति दे दी.
मिल्मा के चेयरमैन ने संकेत दिया था कि कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी होगी. इस बढ़ोतरी को आसान बनाने के लिए आचार संहिता में ढील देने का अनुरोध चुनाव आयोग को भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उन्होंने यह भी बताया कि दिसंबर में दूध की कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं, क्योंकि सरकार के निर्देशों के अनुसार, चुनावों से पहले ऐसा करना गलत माना गया था.
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