Goat Feed: बकरीद के बकरों को क्या खि‍लाएं और क्या नहीं, खत्म हुई ये परेशानी

Goat Feed: बकरीद के बकरों को क्या खि‍लाएं और क्या नहीं, खत्म हुई ये परेशानी

Goat Feed शहर में पशुओं को चराने के लिए जगह ही नहीं है. शहर में हरा चारा भी आसानी से नहीं मिल पाता है. और जब बकरों को हरा चारा ही खाने को नहीं मिलेगा तो वो मोटे-ताजे कैसे होंगे. लेकिन केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के गोट एक्सपर्ट की एक सलाह सभी परेशानियों को दूर कर देती है. बकरों को गांव-देहात की जगह शहर में पालना आसान बनाती है.

Advertisement
Goat Feed: बकरीद के बकरों को क्या खि‍लाएं और क्या नहीं, खत्म हुई ये परेशानीसीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तक

ज्यादातर मुस्िे म बकरीद के मौके पर बकरों की कुर्बानी देते हैं. तीन दिन तक कुर्बानी का सिलसिला जारी रहता है. इस महीने 26 या 27 तारीख को बकरीद का त्यौहार मनाया जाएगा. लेकिन कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने वालों के सामने सबसे ज्यादा परेशानी ये आती है कि घर लाने के बाद उन्हें क्या खि‍लाएं और क्या नहीं. क्योंकि शहर में इतनी जगह तो होती नहीं है कि बकरों को सुबह-शाम खुले में चरने के लिए छोड़ दिया जाए. हर साल कुर्बानी करने वालों के सामने ये परेशानी आती है. 

लेकिन अच्छी खबर ये है कि केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा ने इसका हल खोज लिया है. अब बकरों की खुराक को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. सीआईआरजी ने एक ऐसा फीड तैयार किया है जिसे खि‍लाने के बाद सिर्फ पानी पिलाने की जरूरत होती है. एक्सपर्ट की मानें तो ये एक ऐसा फीड है जिसमे हर चीज शामिल है. 

CIRG के फीड पर शहर में पलेंगे बकरे

गोट एक्सपर्ट डॉ. एके दीक्षित का कहना है कि शहर में बकरा-बकरी पालन करना अब कोई मुश्कि‍ल काम नहीं है. ये कोई जरूरी नहीं है कि बकरों को फार्म और घर में रखकर सूखे, हरे और दानेदार चारे का अलग-अलग इंतजाम किया जाए. सीआईआरजी ने चारे की फील्ड में कई ऐसी रिसर्च की है कि जिसके बाद आपको बकरे के लिए तीन तरह के अलग-अलग चारे का इंतजाम करने की जरूरत नहीं है. संस्थान के साइंटिस्ट ने हरे, सूखे और दाने वाले चारे को मिलाकर पैलेट्स फीड तैयार किया है. जरूरत के हिसाब से बकरे और बकरियों के सामने पैलेट्स रख दिजिए, जब पानी का वक्त हो जाए तो पानी पिला दिजिए. इसके अलावा कुछ और न खिलाने की जरूरत है और न ही पिलाने की.

शहर में पालें इस नस्ल के बकरे  

सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट और बरबरी नस्ल के एक्सपर्ट एमके सिंह का कहना है कि बरबरी नस्ल को शहरी बकरी भी कहा जाता है. अगर आपके आसपास चराने के लिए जगह नहीं है तो इसे खूंटे पर बांधकर या छत पर भी पाला जा सकता है. अच्छा चारा खिलाने से इसका वजन नौ महीने का होने पर 25 से 30 किलो, एक साल का होने पर 40 किलो तक हो जाता है. अगर सिर्फ मैदान या जंगल में चराई पर ही रखा जाए तब भी एक साल का बकरा 25 से 30 किलो का हो जाता है.

ये भी पढ़ें- Breed Production: OPU-IVF से मां बनेंगी सड़क-खेतों में घूमने वाली छुट्टा गाय

ये भी पढ़ें- Egg Production: पोल्ट्री फार्म में कैसे बढ़ेगा अंडा उत्पादन, पढ़ें पोल्ट्री एक्सपर्ट के 10 टिप्स

POST A COMMENT