
देशभर की अनाज मंडियों में धान की कीमतों में तेजी का रुख बना हुआ है. यह स्थिति लंबे समय बाद देखने को मिल रही है, जब बाजार में नई फसल की आवक हो रही है और दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में कई राज्यों में धान का औसत भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर रहा. कर्नाटक में धान का औसत थोक भाव ₹5,418.14 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि राजस्थान में यह ₹3,554.81 और दिल्ली में ₹3,522.06 प्रति क्विंटल रहा. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में भी धान ₹3,400 प्रति क्विंटल से अधिक औसत भाव पर बिका.
केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल तय किया है. ऐसे में कर्नाटक में सामान्य धान का औसत भाव MSP से करीब ₹2,977 प्रति क्विंटल अधिक रहा. राजस्थान में भाव करीब ₹1,114 और दिल्ली में ₹1,081 प्रति क्विंटल ज्यादा रहा. हालांकि, कुछ राज्यों में पिछले सप्ताह के मुकाबले कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई.
एगमार्कनेट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 9 से 15 अक्टूबर 2026 के दौरान तमिलनाडु में धान का औसत भाव ₹3,157.78 प्रति क्विंटल रहा. यह पिछले सप्ताह के ₹2,840.51 प्रति क्विंटल से 11.2% अधिक है. कर्नाटक में औसत भाव पिछले सप्ताह के ₹3,415.12 से बढ़कर ₹5,418.14 प्रति क्विंटल हो गया यानी 58.6% की साप्ताहिक बढ़ोतरी दर्ज की गई.
तेलंगाना में धान का औसत भाव ₹2,604.06 प्रति क्विंटल रहा, जो पिछले सप्ताह से 5.6% अधिक है. आंध्र प्रदेश में कीमत 5.1% बढ़कर ₹2,796.93 और मध्य प्रदेश में 4.4% बढ़कर ₹3,450.16 प्रति क्विंटल पहुंच गई. उत्तराखंड में भाव 3.1% बढ़कर ₹2,193.30 और त्रिपुरा में 2.5% बढ़कर ₹2,214.29 प्रति क्विंटल रहा.
दूसरी ओर, राजस्थान में पिछले सप्ताह के मुकाबले भाव 3.6% गिरकर ₹3,554.81 प्रति क्विंटल रह गया. गुजरात में 3.5% की गिरावट के साथ औसत भाव ₹2,283.85 और छत्तीसगढ़ में 3.1% की गिरावट के साथ ₹2,292.79 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. उत्तर प्रदेश में भाव 4.3% घटकर ₹2,781.11 प्रति क्विंटल रहा. महाराष्ट्र में 2.1% और दिल्ली में 2.8% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई.
पिछले साल की समान अवधि से तुलना करने पर कई राज्यों में धान के भाव में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई दे रही है. 9 से 15 अक्टूबर 2025 के मुकाबले उत्तर प्रदेश में औसत भाव 42.6% बढ़कर ₹2,781.11 प्रति क्विंटल रहा. राजस्थान में 45.4% की बढ़ोतरी के साथ भाव ₹3,554.81 और मध्य प्रदेश में 31.8% की बढ़ोतरी के साथ ₹3,450.16 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.
महाराष्ट्र में धान का औसत भाव सालाना आधार पर 31.7% बढ़कर ₹3,465.60 प्रति क्विंटल रहा. दिल्ली में 30.6% की वृद्धि के साथ कीमत ₹3,522.06 और केरलम में 18.7% की वृद्धि के साथ ₹2,782.50 प्रति क्विंटल रही. तेलंगाना में भाव 17.3% और आंध्र प्रदेश में 15.5% बढ़ा. तमिलनाडु में सालाना बढ़ोतरी 53.2% दर्ज की गई.
हालांकि, सभी राज्यों में कीमतें नहीं बढ़ीं. मणिपुर में औसत भाव पिछले साल के ₹3,337.69 से घटकर ₹3,000 प्रति क्विंटल रहा यानी 10.1% की गिरावट. पंजाब में सालाना बढ़ोतरी 3.5% और हरियाणा में 3.1% रही. उत्तराखंड में भाव पिछले साल की समान अवधि से 2% अधिक था.
राज्यवार साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, 9 से 15 अक्टूबर के दौरान सामान्य धान का अखिल भारतीय भारित औसत थोक भाव ₹2,791.72 प्रति क्विंटल रहा. इससे पिछले सप्ताह यानी 1 से 8 अक्टूबर के दौरान यह ₹2,720.80 प्रति क्विंटल था. सितंबर के दूसरे सप्ताह में यह ₹2,672.45 और अक्टूबर 2025 की समान अवधि में ₹2,342.13 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था.
आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह का अखिल भारतीय औसत भाव पिछले सप्ताह से करीब 2.6% और पिछले साल की समान अवधि से लगभग 19.2% अधिक रहा. यह भारित औसत है, जिसकी गणना मंडियों में आवक की मात्रा और प्रचलित भाव के आधार पर की जाती है. अलग-अलग राज्यों और मंडियों में कीमतों का अंतर बना हुआ है.
जानकारों का कहना है कि खरीफ सीजन में धान की बुवाई के रकबे और उत्पादन को लेकर बाजार में कई आशंकाएं बनी हुई हैं. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्टूबर तक धान का रकबा पिछले साल की समान अवधि से करीब 15.56 लाख हेक्टेयर कम था. इससे उत्पादन पर संभावित असर को लेकर चिंता बनी हुई है. हालांकि, रकबे में कमी का वास्तविक उत्पादन पर कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन अंतिम फसल आंकड़ों से ही हो सकेगा.
वहीं, रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.वी. कृष्णा राव ने 2026 में भारत के चावल उत्पादन में करीब 1 करोड़ टन (100 लाख टन) की संभावित गिरावट का अनुमान जताया है. इसके अलावा भारत के घरेलू इथेनॉल उद्योग में भी चावल की मांग तेजी बनी हुई है.
केंद्र सरकार ने इथेनॉल सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बफर स्टॉक से 72 लाख टन चावल डिस्टिलरीज़ यानी इथेनॉल निर्माताओं को बेचने का फैसला किया है. पिछले साल यह मात्रा 52 लाख टन थी. ऐसे में भारत में उत्पादन, घरेलू मांग, सरकारी खरीद और निर्यात की स्थिति आने वाले समय में धान की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे.
वहीं, मौसम की स्थिति भी खरीफ फसलों के लिए अहम बनी हुई है. अल नीनो की आशंका और मॉनसून की बारिश में संभावित कमी को लेकर कृषि क्षेत्र में चिंता रही है. कमजोर बारिश का असर फसल की पैदावार और उत्पादन पर पड़ सकता है.
इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण ईंधन, माल ढुलाई और खाद की सप्लाई पर असर की आशंका भी बनी हुई है. अब आने वाले समय में चावल निर्यात, सरकारी भंडार और घरेलू बाजार में मांग की स्थिति कीमतों की दिशा तय करेगी.