Goats Treatment: बीमार होने पर बकरी चारे में तलाश लेती है दवाई, इन बीमारियों का खुद कर लेती है इलाज 

Goats Treatment: बीमार होने पर बकरी चारे में तलाश लेती है दवाई, इन बीमारियों का खुद कर लेती है इलाज 

Goats Treatment हरा चारा बकरे-बकरियों का सिर्फ पेट ही नहीं भरता है, बल्कि ये उनके लिए दवाई का काम भी करता है. इसीलिए गोट एक्सपर्ट बकरी पालन करने वालों को कुछ खास पेड़ों के पत्ते खि‍लाने की सलाह देते हैं. क्योंकि जो बकरियां खुले मैदान में चरने जाती हैं वो खुद ही इस तरह के पत्तों को चुनकर खा लेती हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 02, 2026,
  • Updated Mar 02, 2026, 2:58 PM IST

फार्म एनिमल की बात करें तो सिर्फ बकरी ऐसा पशु है जो अपनी छोटी-छोटी बीमारियों का खुद से इलाज कर लेती है. बीमार होने पर बकरी खुद हरे चारे में अपने लिए दवाई चुनकर खा लेती है. खुले मैदान में चरने के लिए जाने वाली बकरियां ऐसे चारे को दवाई के तौर पर ही खाती हैं जो उनकी बीमारियों को ठीक करते हैं. जैसे बकरी को अगर दस्त लगे हों तो खुले मैदान में यहां-वहां एक खास पौधे का पत्ता तलाश कर खा लेती है. जिससे उसके दस्त ठीक हो जाते हैं. 

पौधे की मात्रा भी वो उतनी ही खाती है जितनी दवाई बतौर जरूरी हो. इतना ही नहीं पेट संबंधी बीमारियों को ठीक करने के लिए चार ऐसे पेड़ हैं जिनके पत्ते बकरे-बकरी खाते रहते हैं. खासतौर पर पेट को साफ रखने के लिए खुले में चरने वाले बकरे-बकरियां इन पौधों के पत्तों को हफ्ते में दो-तीन बार खा ही लेते हैं. 

दस्त में इस पौधे के पत्ते खाती हैं बकरियां 

केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि बकरे-बकरियों को जब दस्त होते हैं तो वो इसका इलाज खुद ही कर लेते हैं. जैसे खुले मैदान में चरने के लिए जाने वाले बकरे-बकरी खरपतवार की तरह से उगने वाले भांग के पौधों की कुछ पत्ि मयां खा लेती है. और खास बात ये है कि बकरे-बकरियां भांग के पौधों की उतनी ही पत्ति‍यां खाते हैं जितनी दवाई के तौर पर जरूरत होती है.  

पेट की परेशानियों के लिए खाती हैं ये पत्ते 

सीआईआरजी के एक्सपर्ट का कहना है कि बकरे-बकरियों को पेट संबंधी परेशानियां बहुत होती हैं. जैसे पाचन सिस्टम का जल्दी-जल्दी खराब होना. और खासतौर पर बरसात के दिनों में पेट में कीड़े होना. और इन सब परेशानियों का सबसे बढि़या इलाज जामुन, अमरूद, नीम और मोरिंगा के पत्ते हैं. यही वजह है कि खुले में चरने वाले बकरे-बकरी हफ्ते में दो-तीन बार यहां-वहां तलाश कर इनके पत्ते खा ही लेते हैं.

गौरतलब रहे बकरियों के पेट में अगर कीड़े होंगे तो उसके चलते बकरे और बकरियों की ग्रोथ नहीं हो पाएगी. पशुपालक जितना भी बकरे और बकरियों को खिलाएगा वो उनके शरीर को नहीं लगेगा. खासतौर पर जो लोग बकरियों को फार्म में पालते हैं और स्टाल फीड कराते हैं उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना होगा. यहां तक कि एक्सपर्ट बताते हैं कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बकरी नीम गिलोए के पत्ते खाती हैं.

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