हो सकता है ज्यादातर पशुपालकों को ये बात पता हो, लेकिन इसके बाद भी पशुपालक गाय-भैंस का दूध निकालते वक्त लापरवाही बरतते हैं. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो दूध निकालते वक्त भी बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है. बायो सिक्योरिटी का पालन करना जरूरी होता है. अगर इसमे जरा भी लापरवाही हुई तो फिर गाय-भैंस को गंभीर बीमारी होने का खतरा पैदा हो जाता है. खासतौर पर बरसात के दिनों में दूध निकालते वक्त बायो सिक्योरिटी का पालन जरूर करना चाहिए. एनिमल साइंटिस्ट और एक्सपर्ट का कहना है कि बरसात में संक्रमण बहुत होता है. दूध निकालते वक्त साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया तो पशुओं को थनैला बीमारी हो सकती है.
पशुपालन और डेयरी में ज्यादातर होने वाले बड़े नुकसान की वजह थनैला बीमारी ही मानी जाती है. क्योंकि डेयरी का अर्थशास्त्र पशु के दूध उत्पादन और बाजार में उस पर होने वाले मुनाफे पर टिका होता है. लेकिन जैसे ही पशु दूध देना कम कर देता है या किसी बीमारी के चलते दूध दूषित हो जाता है तो डेयरी का अर्थशास्त्र सबसे पहले बिगड़ता है. पशुपालक का मुनाफा घटने के साथ लागत बढ़ जाती है.
थनैला बीमारी होने की वजह
- थनैला बीमारी की सबसे बड़ी वजह खराब डेयरी मैनेजमेंट है.
- कई बार मैनेजमेंट के दौरान पशुओं की देखभाल में लापरवाही जाती है.
- लापरवाही के चलते दूध देने वाला पशु थनैला बीमारी का शिकार हो जाता है.
- जैसे दूध निकालने से पहले थनों की सफाई ना करना.
- दूध निकालने वाले के कपड़े और हाथों के गंदा होने पर.
- दूध निकालने वाला अगर बीमार है.
- जिस बर्तन में दूध निकाला जा रहा उसका साफ ना होना.
- गंदी जगह पर बैठकर पशु का दूध निकालना.
- गाय-भैंस के बच्चे को दूध पिलाने के बाद थनों को ना धोना.
- पशु के पेट, थन और पूंछ पर चिपकी गंदगी से.
थनैला की रोकथाम के उपाय
- दूध दुहते समय पानी, बर्तन और फर्श की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट रहें.
- डेयरी में काम करने वाली लेबर के गंदा रहने और उनके गंदे कपड़े बीमारी को बढ़ा देते हैं.
- खराब खान-पान और तनाव पशुओं में थनैला से लड़ने की क्षमता को कमजोर करते हैं.
- लुवास के वाइस चांसलर (वीसी) के मुताबिक थनैला बीमारी की पहचान दूध से की जा सकती है.
- दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की जांच से थनैला के बारे में वक्त रहते पता लग जाएगा.
- इसके लिए दूध के नमूने को स्फेक्ट्रो फोटो मीटर की मदद से जांचा जाता है.
- अगर पशु थनैला बीमारी से पीडि़त है तो दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाएगी.
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