
बेशक देश के कुल दूध उत्पादन में गाय के दूध की हिस्सेदारी ज्यादा है, बावजूद इसके जब भी दूध की बात होती है तो भैंस का नाम पहले नंबर पर आता है. इतना ही नहीं ऐसा ही कुछ हाल बफैलो मीट का है. देश ही नहीं विदेशों में भी भारतीय बफैलो मीट को खूब पसंद किया जाता है. एक्सपर्ट की मानें तो इसकी बड़ी वजह है भैंस. कुल दूध उत्पादन में जहां भैंस के दूध की हिस्सेदारी 43 फीसद है, वहीं मीट उत्पादन में हम विश्व में चौथे नंबर पर हैं. और इस सबके पीछे नदी भैंस का बड़ा योगदान है. नदी भैंस के चलते भी बफैलो मीट को विश्व के सबसे ज्यादा देशों में पसंद किया जाता है.
वहीं देश में भैंस के दूध की डिमांड ज्यादा रहती है. बड़े दुधारू पशुओं की बात करें तो उसमे भैंसों की संख्या 11 करोड़ के आसपास है. ज्यादा दूध देने और दूध की क्वालिटी के मामले में मुर्राह नस्ल की भैंस सबसे अव्वल मानी जाती है. देश में प्योर ब्रीड वाली भैंसों की कुल संख्या में मुर्राह की संख्या 4.70 करोड़ यानि 43 फीसद है. भदावरी नस्ल की भैंस ऐसी है जिसके दूध में सबसे ज्यादा फैट पाया जाता है.
डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो भैंसे दो तरह की होती हैं. एक जिन्हें दलदली कहा जाता है और दूसरी नदी भैंस. खासतौर पर भारत, पाकिस्तान, बुल्गारिया, हंगरी, तुर्की, इटली और मिस्र में नदी भैंस आम है. ब्राज़ील में भी नदी भैंस पाई जाती हैं. नदी भैंसें शारीरिक रूप से बड़ी होती हैं. सींग मुड़े हुए होते हैं. जैसा की इन्हें नदी भैंस कहा जाता है तो ये तालाब और नदी के साफ पानी में लोटना ज्यादा पसंद करती हैं. नदी भैंसों में सबसे ज्यादा दूध देने वाली नस्ल की बात करें तो सबसे ऊपर मुर्राह, नीली-रावी, मेहसाना, सुरती, बानी, भदावरी और जाफराबादी का आता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में रजिस्टर्ड भैंसों की नस्ल 20 हैं.
एक्सपर्ट का मानना है कि भारत, पाकिस्तान, इटली और मिस्र में भैंस का दूध पीना कल्चर का एक हिस्सा है. और खास बात ये कि भैंसों पर जितनी रिसर्च इन देशों में हुई है या हो रही है उतनी दुनिया के किसी भी देश में अब तक नहीं हुई है. हरियाणा के हिसार में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ बफैलो रिसर्च लगातार भैंस पर रिसर्च करता रहता है. हर साल कुछ दूध उत्पादन में 40 फीसद से ज्यादा हिस्सेदारी गाय के दूध की रहती है. वहीं उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और आंध्रा प्रदेश में भैंस के दूध का ज्यादा उत्पादन होता है. हमारे देश में दूसरे देशों के मुकाबले दुधारू पशुओं की संख्या कहीं ज्यादा है.
जिस कोरोना-लॉकडाउन ने दुनिया के बाजारों को हिलाकर रख दिया. बड़ी-बड़ी कंपनियों पर ताला लग गया. उस दौर में भी भारत के बोनलेस मीट एक्सपोयर्ट पर मामूली असर ही देखने को मिला था. आज दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में भारत से भैंस का बोनलेस मीट एक्सपोर्ट किया जाता है. मौका मिलते ही हमारा पड़ोसी और दुश्मन मुल्क पाकिस्तान भी भैंस का मीट चखने से पीछे नहीं रहता है. कोरोना के बावजूद बीते तीन साल में मीट एक्सपोर्ट में 90 हजार टन से ज्यादा का इजाफा हुआ है. भारत का बफैलो मीट एक्सपोर्ट में चौथा नंबर है. विश्व के कुल मीट एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 40 फीसद से ज्यादा की है.
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