Animal Husbandry in Budget: बजट में पशुपालन के लिए दो बड़े ऐलान के पीछे ये है बड़ी वजह 

Animal Husbandry in Budget: बजट में पशुपालन के लिए दो बड़े ऐलान के पीछे ये है बड़ी वजह 

Animal Husbandry in Budget एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि जूनोटिक या फिर जूनोसिस बीमारी वो होती हैं जो पशुओं से इंसानों में होती हैं. कोविड, इबोला, जीका वायरस, रैबीज और एवियन इंफ्लूंजा आदि बीमारी इसी कैटेगिरी में आती हैं. इसी को देखते हुए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली समेत कई संस्थान में इस तरह के मास्टर इन वन हेल्थ कोर्स शुरू हो रहे हैं.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 02, 2026,
  • Updated Feb 02, 2026, 5:30 PM IST

कोरोना (कोविड19) के बाद से पशुपालन और मुर्गीपालन (पोल्ट्री) को लेकर नए तरह से सोचा जाने लगा है. इस सोच के पीछे भी एक बड़ी वजह है. एक्सपर्ट के मुताबिक 70 फीसद वायरल बीमारियां ऐसी हैं जो दुधारू पशु और मुर्गियों से होती हैं. यही वजह है कि संक्रमण से होने वाली बीमारियों को लेकर लोग सजग हो रहे हैं. संक्रमण से होने वाली महामारी के बारे में किसी को नहीं पता कि कब और कहां से संक्रमण लग जाएगा. इसी को देखते हुए वर्ल्ड लेवल पर वन हैल्थ मिशन शुरू किया गया है. 

भारत में भी नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) शुरू किया गया है. लेकिन इसके लिए भी बड़ी संख्या में पशु चिकित्सक (Veterinarian), वेटरनरी कालेज, पैरा वेट कॉलेज, वेटरनरी हॉस्पि‍टल, डायग्नोस्टिलक, लेबोरेटरी की जरूरत होगी. इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पशुपालन के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया है. 

इन बीमारियों से निपटने की हो रही तैयारी

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कोविड, स्वाइन फ्लू, एशियन फ्लू, इबोला, जीका वायरस, एवियन इंफ्लूंजा समेत और भी न जानें ऐसी कितनी महामारी हैं जो पशु-पक्षियों से इंसानों में आई हैं. इसकी पूरी एक लम्बी फेहरिस्त है. हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक 17 लाख वायरस जंगल में फैले होते हैं. इसमे से बहुत सारे ऐसे हैं जो जूनोटिक हैं. जूनोटिक के ही दुनिया में हर साल एक बिलियन केस सामने आते हैं और इससे एक मिलियन मौत हो जाती हैं.

लेकिन अब वर्ल्ड लेवल पर इस पर काबू पाने की कवायद शुरू हो गई है. भारत में भी एनओएचएम के नाम से अभियान शुरू कर दिया गया है.. हालांकि शुरुआती दौर में यह पहले पांच राज्यों से शुरू किया गया था. लेकिन अब जी-20 महामारी कोष से बजट मिलने के बाद इसे देशभर में चलाया जाएगा.

ऐसे निपटेंगे जूनोटिक बीमारियों से  

  • नेशनल और स्टेदट लेवल पर महामारी की जांच को संयुक्त टीम बनेगी. महामारी फैलने पर संयुक्तं टीम रेस्पांस करेगी. 
  • नेशनल लाइव स्टॉक मिशन की तरह से सभी पशुओं के रोग की निगरानी का सिस्टम तैयार किया जाएगा. 
  • मिशन के रेग्यूलेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने पर काम होगा. जैसे नंदी ऑनलाइन पोर्टल और फील्ड परीक्षण दिशा निर्देश हैं. 
  • महामारी फैलने से पहले लोगों को उसके बारे में चेतावनी देने के लिए सिस्टम बनाने पर काम होगा. 
  • नेशनल डिजास्टर मैंनेजमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर जल्द से जल्द महामारी की गंभीरता को कम करना. 
  • प्राथमिक रोगों के टीके और उसका इलाज विकसित करने के लिए तय अनुसंधान कर उसे तैयार करना. 
  • रोग का पता लगाने के तय समय और संवेदनशीलता में सुधार के लिए जीनोमिक और पर्यावरण निगरानी फार्मूले तैयार करना जैसे काम होंगे.

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