
बजट 2026 पेश करने के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मछली पालन से जुड़ी दो बड़ी चर्चाएं की. पहली जलाशयों में केज कल्चर को बढ़ावा देने से जुड़ी है, वहीं दूसरी विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से जुड़ी है. ईईजेड से जुड़ी चर्चा पूरी तरह अंडमान-निकोबार और लक्षदीप क्षेत्र की मत्स्य संपदा के टिकाऊ दोहन से जुड़ी है. हाल ही में मत्स्य विभाग ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को टूना क्लस्टर घोषित किया है. यहां करीब 6 लाख वर्ग किलोमीटर का ईईजेड है. बजट में इस चर्चा के बाद फिश एक्सपोर्ट को लेकर कई उम्मीदें लगाई जा रही हैं.
साथ ही स्थानीय मछुआरों के जीवन सुधार की कड़ी के रूप में भी इस चर्चा को जोड़कर देखा जा रहा है. बजट के दौरान कहा गया है कि केन्द्र सरकार का फोकस पूरी तरह से अंडमान-निकोबार और लक्षदीप क्षेत्र की मत्स्य संपदा के टिकाऊ दोहन पर रहेगा. देश के 500 जलाशयों में सरकार केज कल्चर को बढ़ावा देने की तैयारी भी जोर शोर से कर रही है.
महंगी मछलियों में शामिल टूना के भंडार को देखते हुए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को टूना क्लस्टर घोषित किया है. इसका फायदा कोस्टल एरिया में रहने वाले मछुआरों को मिलेगा. इंटरनेशनल फिश मार्केट में भी टूना मछली की बहुत डिमांड है. इसके चलते खासतौर पर एशियाई देशों में एक मजबूत फिश मार्केट मिलेगा. ये इलाका खासतौर से टूना और टूना जैसी हाई वैल्यू वाली प्रजातियों से भरा हुआ है. एक अनुमान के मुताबिक यहां करीब 60 हजार मीट्रिक टन टूना मछली है. यहां से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की नजदीकी समुद्री और हवाई कारोबार के मौकों को मजबूत बनाती है. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को टूना क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किए जाने से अर्थव्यवस्था, इनकम में बढ़ोतरी और देशभर के मछली पालन में संगठित विकास में तेजी आने की उम्मीद है.
मौजूदा वक्त में भारत से सीफूड एक्सपोर्ट करीब 60 हजार करोड़ रुपये का है. लेकिन जल्द ही एक लाख करोड़ रुपये के टॉरगेट को छूने की तैयारी चल रही है. इसमे सबसे ज्यादा योगदान झींगा का है. और अब इस टॉरगेट को छूने के लिए टूना की मदद ली जा रही है. यही वजह है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नवंबर में इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया था. मीट का आयोजन केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से किया गया था.
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