
इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट जारी हो गई है. अगर एग्रीकल्चर और उससे जुड़े सेक्टर की बात करें तो रिपोर्ट बेहद ही चौंकाने वाली हैं. क्रॉप सेक्टर यानि दाल-अनाज के मुकाबले डेयरी-पोल्ट्री और फिशरीज की ग्रोथ तेजी से हो रही है. फिशरीज ने तो क्रॉप सेक्टर को बहुत पीछे छोड़ दिया है. डेयरी-पोल्ट्री भी क्रॉप सेक्टर से बहुत आगे हैं. एक्सपर्ट की मानें तो कोरोना में और कोरोना के बाद भी जो बाजार चल रहा था तो वो था खाने-पीने का यानि फूड मार्केट. देश में खाने-पीने के सामान से जुड़ा बाजार 50 लाख करोड़ से भी ज्यादा का है.
पोल्ट्री सेक्टर तीन लाख करोड़ का है, डेयरी सेक्टर 20 लाख करोड़ से ज्यादा का है. वहीं फिशरीज सेक्टर मार्केट सात से आठ लाख करोड़ का है.अगर इस बाजार की बात करें तो इसमे दाल-अनाज, डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज सभी शामिल हैं. इस बाजार में अकेले डेयरी सेक्टर की हिस्सेदारी 50 फीसद की है. अगर ग्रोथ की बात करें तो साल 2030 तक इस बाजार के 170 लाख करोड़ के हो जाने की उम्मीद है. अभी ये बाजार 12 से 14 फीसद की रफ्तार से ग्रोथ कर रहा है.
इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के आंकड़ों पर जाएं तो बीते दशक में सबसे ज्यादा ग्रोथ फिशरीज की हुई है. फिशरीज का आंकड़ा 8.8 फीसद पर पहुंच गया है. वहीं लाइव स्टॉक यानि डेयरी-पोल्ट्री की ग्रोथ 7 फीसद पर है. वहीं क्रॉप सेक्टर यानि दाल-अनाज में सिर्फ 3.5 फीसद की ही ग्रोथ हुई है. डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि आज दाल-अनाज से ज्यादा दूध और लाइव स्टॉक का उत्पादन बढ़ रहा है.
अगर हम आंकड़ों पर गौर करें तो दूध का उत्पादन 10 गुना, पोल्ट्री का 23 गुना, फिशरीज का 12 गुना और फल-सब्जी का 5.5 गुना उत्पादन बढ़ चुका है. 50 साल पहले दूध् का उत्पादन 2.4 करोड़ टन था. जबकि आज 25 करोड़ टन पर पहुंच चुका है. अगर हम आंकड़े देखें तो हर 25 साल में दूध का उत्पादन तीन गुना हो जाता है.
आरएस सोढ़ी ने किसान तक को बताया कि देश में खाने-पीने के सामान का जो 50 लाख करोड़ का बाजार है वो 2030 तक 170 लाख करोड़ का हो जाएगा. अभी 50 लाख करोड़ के बाजार में सात लाख करोड़ का बाजार ही ऑर्गेनाइज्ड है. इसमे से भी 3.5 लाख करोड़ का बाजार अकेले डेयरी का ही है. अगर डेयरी की ही बात करें तो ये तेजी से बढ़ रहा सेक्टर है. आज हमारे देश में हर रोज 60 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है.
इसमे से 12 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन ऑर्गेनाइज्ड तरीके से हो रहा है. यही 12 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन सात बाद 24 करोड़ लीटर का हो जाएगा. अब अगर इंडस्ट्री के लिहाज से बात करें तो ऑर्गेनाइज्ड तरीके से एक लाख लीटर दूध प्रोसेसिंग में 50 करोड़ रुपये का खर्च आता है. इस आंकड़े के हिसाब से सात साल में अकेले डेयरी सेकटर में एक लाख करोड़ का निवेश आएगा. मतलब 60 हजार करोड़ रुपये प्रोसेसिंग में और 40 हजार करोड़ रुपये का खर्च मशीनों पर आएगा.
डॉ. सोढ़ी का कहना है कि निवेद की बात तो एकदम क्लियर है. अब अगर नौकरियों और कारोबार की बात करें तो एक लाख लीटर दूध प्रोसेस होने पर छह हजार लोगों के लिए नौकरी और कारोबार के रास्ते खुलते हैं. इसमे टॉप से लेकर नीचे तक सभी तरह की नौकरी शामिल हैं. इसमे से एक बड़ा हिस्सा यानि पांच हजार जॉब गांवों में होंगी तो एक हजार शहर में.
लाइव स्टॉक पर बोलते हुए डॉ. आरएस सोढ़ी ने बताया कि जब खाने-पीने के सामान की बात हो तो लाइव स्टॉक को पीछे नहीं छोड़ सकते हैं. आने वाले सात-आठ साल में लाइव स्टॉक सेक्टर जैसे भेड़-बकरी पालन, पोल्ट्री (अंडा-चिकन), फिशरीज और मीट के बाजार में भी 50 से 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश आएगा. आज पोल्ट्री सेक्टर तीन लाख करोड़ का है. ये सेक्टर हर साल 8 से 10 फीसद की दर से बढ़ रहा है.
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