CNG Gas in Gaushala: 60 हजार गायों के गोबर से यहां हर रोज बन रही 750 किलो सीएनजी

CNG Gas in Gaushala: 60 हजार गायों के गोबर से यहां हर रोज बन रही 750 किलो सीएनजी

CNG Gas in Gaushala अडानी टोटल गैस लिमिटेड मथुरा-वृंदावन की श्रीमाता गौशाला से निकलने वाले गोबर से सीएनजी का उत्पादन कर रही है. गौशाला में 60 हजार से ज्यादा गाय हैं. सीएनजी प्लांट के लिए आसपास के गांवों से भी गोबर खरीदा जा रहा है. इससे पहले गौशाला में गोबर से बायो गैस बनाकर जनरेटर चलाए जा रहे थे. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 02, 2026,
  • Updated Feb 02, 2026, 9:01 AM IST

गौशाला में 60 हजार से ज्यादा गाय पाली जा रही हैं. मजाल क्या की किसी भी गाय का गोबर बेकार चला जाए. हर एक गाय के गोबर का बड़े ही तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. अभी तक गायों के गोबार से बायो गैस बनाई जाती थी. इसी गैस से गौशाला को बिजली मिलती थी तो गायों के अस्पताल में बनी रसोई में खाना भी इसी गैस पर बनता था. लेकिन अब इस गौशाला में सीएनजी गैस बनाई जा रही है. गैस बनाने के लिए गौशाला की 60 हजार से ज्यादा गायों का गोबर इस्तेमाल किया जा रहा है. वहीं गैस बनाने का काम अडानी टोटल गैस लिमिटेड कर रही है. गौशाला के सेवादार ब्रजेंद्र शर्मा के मुताबिक गौशाला के नियमों के मुताबिक कंपनी सीएनजी का उत्पादन कर रही है. 
श्रीमाता गौशाला के नाम से मथुरा-वृंदावन में इस गौशाला का संचालन रमेश बाबा करते हैं. जानकारों की मानें तो अडानी टोटल गैस लिमिटेड गौशाला से निकलने वाले गोबर से सीएनजी बनाएगी. साथ ही गैस बनने के बाद बचे लिक्विड गोबर से खाद बनाकर बेची जाएगी. 13 एकड़ में बने इस प्लांट में रोजाना गौशाला का गोबर तो इस्तेमाल होगा ही साथ ही आसपास के किसानों से भी गोबर खरीदा जाएगा.

गायों पर खर्च होंगे गोबर के पैसे 

सेवादार ब्रजेंद्र शर्मा ने किसान तक को बताया कि एक करार के तहत गौशाला समिति ने अडानी की कंपनी को जमीन दी है. साथ ही हर रोज गौशाला से निकला गोबर भी कंपनी को सीएनजी प्लांट पर दिया जाएगा. इसके बदले कंपनी जमीन का किराया और गोबर का भुगतान करेगी. इतना ही नहीं गोबर से बनी सीएनजी बेचने के बाद जो पैसा आएगा उसमे से कुछ हिस्सा कंपनी गायों की सेवा पर भी खर्च करेगी.

प्लांट को तैयार करने में करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च आया है. इस प्लांट को लेकर गौशाला का कंपनी के साथ 20 साल का करार हुआ है. रमेश बाबा की श्रीमाता गौशाला करीब 275 एकड़ एरिया में फैली हुई है. आज यहां 60 हजार से ज्यादा गाय-बैल और बछड़ों की सेवा की जा रही है. गौशाला से रोजाना 35 से 40 टन गोबर निकलता है. इसी गोबर से सीएनजी बनाई जाएगी. 

हर रोज बनेगी 750 किलो सीएनजी  

एक्सपर्ट की मानें तो 40 टन गोबर की क्षमता वाले किसी भी प्लांट में 750 से 800 किलो तक सीएनजी तैयार की जा सकती है. इसी तरह का एक प्लांट गुजरात में अमूल कंपनी भी चला रही है. वहीं हरियाणा की वीटा डेयरी कंपनी भी नारनौल में एक ऐसा ही प्लांट बनाने की तैयारियों में लगी हुई है. इतना ही नहीं हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में तो प्राइवेट कंपनी नगर निगम की गौशाला से गोबर खरीदकर सीएनजी बना रही हैं. अच्छी बात यह है कि गोबर से सीएनजी बनाने के साथ ही बचे हुए लिक्विड गोबर से आर्गनिक डीएपी भी बनाई जा सकेगी. 

ये भी पढ़ें- PDFA Expo: इनाम में ट्रैक्टर-बुलैट जीतने से पहले गाय-भैंसों को कराना होगा डोप टेस्ट

Economic Survey: कृषि क्षेत्र की धीमी चाल, डेयरी-पोल्ट्री और मछली पालन ने कैसे ली ऊंची उड़ान?

MORE NEWS

Read more!