
चारा पौष्टिक होगा तो दूध उत्पादन बढ़ेगा. दूध की क्वालिटी बढ़ेगी. दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा बढ़ेगी. इतना ही नहीं हर मौसम में पशुओं को उनकी जरूरत के मुताबिक चारा मिलेगा तो दूध की लागत भी कम होगी. लेकिन सभी तरह के चारे की कमी और बढ़ती कीमतों ने पशुपालन और डेयरी सेक्टर में हलचल मचा दी है. साइलेज और हे को लेकर अभी जागरुकता की कमी महसूस की जा रही है. छोटे पशुपालक जिनकी संख्या ज्यादा है उनकी सबसे ज्यादा लागत चारे में जा रही है. लागत बढ़ने से उनका मुनाफा कम हो गया है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि अब तो जब तक केन्द्र सरकार कोई राहत नहीं देगी तो डेयरी की रफ्तार नहीं बढ़ेगी. यही वजह है कि पशुपालन और डेयरी सेक्टर की निगाहें बजट 2026 पर लगी हुई हैं. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि चारा उत्पादन के लिए बीज और चारे से साइलेज बनाने के लिए सरकार बजट में राहत दे सकती है.
फिरोज अहमद, चारा एक्सपर्ट और डॉयरेक्टर, कॉर्नेक्स्ट एग्री प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का कहना है कि इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा ये है कि डेयरी लागत को कैसे कम किया जाए. इसके लिए एक सबसे बड़ा काम ये किया जा सकता है कि डेयरी पशुओं की खुराक में पोषण को अहमियत दी जानी चाहिए. चारे की उत्पादकता बढ़ाई जाए. विपरीत हालात में भी पशुओं के लिए चारे की कमी ना हो और सप्लाई लगातार बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम बनाने पर काम करने की जरूरत है.
चारा एक्सपर्ट के मुताबिक चारा उत्पादक किसान क्वालिटी का चारा उत्पादन कर सकें इसके लिए के चारा और चारा बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यस्तर पर योजनाएं बनानी होंगी. बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू स्तर पर उपलब्धता बढ़ानी होगी. इतना ही नहीं नॉन फारेस्ट बंजर जमीन, चरागाह और सामुदायिक जमीन का इस्तेमाल पशुओं के हरे चारे की खेती करने को बढ़ावा देना होगा.
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