Poultry Farm Management: अंडे-चिकन के उत्पादन पर गर्मियों का नहीं पड़ेगा असर, मुर्गे-मुर्गियों को दें ऐसा दाना-पानी

Poultry Farm Management: अंडे-चिकन के उत्पादन पर गर्मियों का नहीं पड़ेगा असर, मुर्गे-मुर्गियों को दें ऐसा दाना-पानी

Poultry Farm Management नियमों के मुताबिक जिस जमीन पर फार्म खोलना है तो पहले वहां के ग्राउंड वॉटर की जांच करानी चाहिए. अगर पीने के पानी की क्वालिटी सही नहीं है तो फिर फार्म पर मुर्गियां आए दिन बीमार होंगी. हालांकि पीने के पानी की क्वालिटी का पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि उसकी माइक्रोबियल और कैमिकल जांच करा ली जाए. 

egg production in saharanpuregg production in saharanpur
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 21, 2026,
  • Updated May 21, 2026, 8:00 AM IST

बहुत सारे पोल्ट्री फार्मर ये तय मान लेते हैं कि गर्मियां आ गई हैं तो अब अंडे-चिकन के उत्पादन पर असर तो पड़ेगा ही पड़ेगा. कुछ वक्त पहले की बात करें तो उनका ऐसा सोचना गलत भी नहीं था. लेकिन अब पोल्ट्री फार्म में जिस तरह की टेक्नोलॉजी आ गई है तो उसके बाद इस तरह की बातें बेमानी हो जाती हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अंडे देने वाली मुर्गी हो या फिर चिकन के लिए पाले जाने वाले मुर्गे, मौसम के हिसाब से इनके दाने-पानी का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. क्योंकि पीने के पानी में अगर जरा सी भी कोई कमी हुई तो फिर मुर्गी का अंडे देना बंद हो जाएगा. 

वहीं मुर्गे की ग्रोथ भी अच्छी तरह से नहीं हो पाएगी.पानी में आंखों से ना दिखाई देने वाले जीवाणु-कीटाणु आने का जो माध्यम है उसमे तालाब, नदियां, खुले कुएं, पब्लिक वॉटर सप्लाई सिस्टम, स्टोर कर ट्रांसपोर्ट करने के दौरान और ओवरहेड टैंक आदि होते हैं. इसलिए मानकों पर खरे उतरने वाले पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए. पोल्ट्री फार्म खोलने के नियम में भी पानी के बारे में साफ हिदायत दी गई है.  

पानी पिलाने में ऐसे रहें अलर्ट

  • सस्ते और सरल तरीकों से अतिरिक्त घुले खनिजों को हटाना व्यावहारिक नहीं है. 
  • पानी में खनिजों की मात्रा ज्यादा होने पर दूसरे वॉटर सोर्स इस्तेमाल करने चाहिए. 
  • माइक्रोबियल से छुटकारा पाने के लिए क्लोरीनीकरण सबसे अच्छा और सस्ता तरीका है.
  • पीने के पानी में पीपीएम की मात्रा एक से दो होनी चाहिए. 
  • पीपीएम का लेवल बनाने के लिए 1000 लीटर पानी में पांच-आठ ग्राम ब्लीचिंग पाउडर मिलाएं. 
  • पानी में मिलाए जा रहे ब्लीचिंग पाउडर में क्लोरीन की मात्रा 35 फीसद होनी चाहिए. 
  • पानी को एक घंटे रोकने के बाद ही मुर्गियों को पिलाएं. 
  • जहां एक घंटे तक पानी स्टोर नहीं किया जा सकता है वहां पानी में क्लोरीन डाइऑक्साइड पांच फीसद, एक मिलीलीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट (सैनीटेक) 10 लीटर पानी में इस्तेमाल करना चाहिए. 
  • 1.6 फीसद आयोडीन युक्त आयोडोफोर का इस्तेमाल वॉटर सैनिटाइजर के रूप में करना चाहिए. 
  • क्वाटरनरी अमोनियम यौगिक युक्त प्रोडक्ट जैसे क्वाट, क्वाटोवेट, एन्सिवेट, सोक्रेना आदि का इस्तेमाल एकसपर्ट की सलाह पर वॉटर सैनिटाइजर के रूप में किया जा सकता है.

पीने के पानी का इंतजाम- 

डिहाईड्रेशन और गर्मी के असर को कम करने के लिए पोल्ट्री फार्म में ताजा और ठंडा पीने का पानी बहुत जरूरी है. पानी की क्वालिटी को बेहतर बनाए रखने और उसकी जांच करने करने वाले उपकरण लगवाएं. पानी का छिड़काव भी करवा सकते हैं. 

गर्मी से ऐसे करें बचाव 

हवादार खिड़की-दरवाजे- 

पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि पोल्ट्री  फार्म में जरूरी तापमान और हवा बनाए रखने के लिए ये जरूरी है कि फार्म में खिड़की-दरवाजों का सिस्टम ठीक हो. एग्जास्ट फैन लगाए गए हों. फार्म की बाहरी दीवारों पर गीली बोरी का इस्तेमाल किया जा सकता है. 

ऐसा हो दिन का फीड- 

गर्मी के मौसम में ये बहुत ही जरूरी है कि मुर्गे-मुर्गियों की पोषक तत्वों की जरूरत को पूरा किया जाए. दिन के फीड को इस तरह से तैयार किया जाए वो मुर्गियों में हीट स्ट्रै्स को कम करने वाला हो. दिन के वक्त इलेक्ट्रोलाइट की खुराक मुर्गे-मुर्गियों को डिहाईड्रेशन से बचाती है.  

ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल

ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

MORE NEWS

Read more!