
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना समेत छह महामारी को इमरजेंसी घोषित किया है. इसमे से पांच ऐसी बीमारियां हैं जो पशु द्वारा होती हैं. इसीलिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) के तहत दुनियाभर में काम चल रहा है. इसी कड़ी में भारत में भी इस अभियान की शुरुआत हो चुकी है. एनिमल हसबेंडरी से जुड़े एक्सपर्ट का मानना है कि इस मिशन से मानव और पशुओं की हैल्थ तो सुधरेगी ही साथ में देश की अर्थव्यवस्था को भी सुधार जा सकेगा. क्योंकि हमारे देश में पशुपालन की मदद से गरीब वर्ग के स्तर को उठाने के लिए एक अभियान के तौर पर काम हो रहा है.
जबकि पशुओं में महामारी के रूप में होने वाली बीमारी इस अभियान को धक्का पहुंचा सकती है. बड़ा खतरा जूनोटिक बीमारियों (पशुओं से इंसानों को होने वालीं) का है. इसी की रोकथाम के लिए भारत में इस अभियान को एशियाई विकास बैंक (ADB), खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और WHO मदद कर रहे हैं. इसके लिए भारत को 25 मिलियन डॉलर यानि करीब 200 करोड़ रुपये का बजट मिला है.
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एनिमल हसबेंडरी कमिशन अभिजीत मित्रा ने बताया कि पेंडेमिक फंड महामारी की रोकथाम, तैयारी और रेस्पांस करने के साथ ऐसे रिसोर्स भी तैयार करेगा जो निवेश बढ़ाने, भागीदारों के बीच समन्वय बढ़ाने और इसे बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा. इस परियोजना का उद्देश्य पशु स्वास्थ्य खतरों को रोकने, बीमारी का पता लगाने और उनका इलाज करने की क्षमता को देश में बढ़ाया जाएगा. इसके साथ ही परियोजना के तहत बीमारी की सर्विलांस, अर्ली वर्निंग सिस्टम को मजबूत करना, लैब नेटवर्क को मजबूत बनाना और डेटा सिस्टम में सुधार करना प्रमुख होगा.
वहीं डेयरी सचिव अलका उपाध्याय ने बताया कि किसी भी महामारी के दौरान सीमा पार के केस एक बड़ी परेशानी बनते हैं. इसके लिए भी अभियान में काम किया जाएगा. कोऑर्डिनेशन बनाने के लिए बैठकें की जाएंगी. कुल मिलाकर इस अभियान का सबसे बड़ा मकसद ये है कि कोई बीमार जानवर (पालतू और वन्यजीव) मानव आबादी में ना फैले, जिससे कमजोर आबादी के स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा और आजीविका को खतरा हो. इसके लिए भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है-
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