
एक्सपर्ट की मानें तो अल नीनो के असर के चलते बारिश कम होने की संभावना है. वहीं गर्मी और ज्यादा पड़ेगी. इसकी वजह से पशु भी खासे परेशान रहेंगे, खासतौर से दुधारू पशु. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो दूध में 80 फीसद पानी होता है. इसलिए गर्मियों के मौसम में पशुओं के लिए पानी एक बड़ी समस्या बन जाता है. खासतौर पर पीने के पानी और रखरखाव में होने वाली छोटी सी गलती भी भारी पड़ जाती है. क्योंकि गर्मी के दौरान पशु सबसे ज्यादा हीट स्ट्रोक और हीट स्ट्रेस की चपेट में आ जाते हैं.
गर्मी के मौसम में खासतौर पर जून तक पशुओं के पीने के पानी का बहुत ख्याल रखना चाहिए. हरा चारा भी पानी की कमी को पूरा करता है. अगर इस दौरान पानी पिलाने और सुबह-शाम नहलाने में कोताही बरती गई तो पशु हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक की चपेट में आ सकता है. जरा सी भी लापरवाही होने पर गर्मी के मौसम में पशु बीमारियों की चपेट में आ आते हैं.
जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है.
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