Water for Animal: तेज होती गर्मी में पशुओं में पानी की कमी से होते हैं ये नुकसान, ऐसे करें पहचान

Water for Animal: तेज होती गर्मी में पशुओं में पानी की कमी से होते हैं ये नुकसान, ऐसे करें पहचान

Water for Animal एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी के चलते पशुओं को सबसे बड़ी डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रैस जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है. वहीं एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि गर्मियों के दौरान पशुओं को हरा चारा खूब खि‍लाना चाहिए. एक किलो हरे चारे से पशु में तीन से चार लीटर तक पानी की कमी पूरी हो जाती है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 09, 2026,
  • Updated Jun 09, 2026, 3:40 PM IST

जून के इस महीने में गर्मी अपने चरम पर है. ऊपर से अल नीनो को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं. अगर अल नीनो का असर मौसम पर पड़ा तो तापमान और ऊपर जा सकता है. अभी देश के ज्यादातर हिस्सों में 40 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तक तापमान पहुंच चुका है. ऐसे में खासतौर पर पशुओं को लेकर खास सतर्कता बरतने की जरूरत है. क्योंकि पशुओं में पानी की कमी से कई छोटी-बड़ी परेशानियां होने लगती हैं. पानी पिलाने में जरा सी भी कोताही बरती गई तो 45 डिग्री वाले तापमान, लू वाली तेज गर्म हवाएं और हीट स्ट्रैस के चलते पशुओं को किसी भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. 

और एक बार अगर दुधारू पशु बीमार पड़ गया तो फिर एक नहीं कई तरह से पशुपालक को नुकसान उठाना पड़ता है. गर्मी में पशुओं के लिए साफ और ताजा पानी पीना बहुत जरूरी है. पानी ना पीने पर किस तरह की परेशानी हो सकती है, उसके लक्षण क्या हैं और परेशानी होने पर किस तरह के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं. लेकिन, अगर पानी का ख्याल रखा जाए तो पशु को बीमार होने और उत्पादन कम होने के नुकसान से बचा जा सकता है.   

पशु को कम पानी पिलाने के नुकसान 

एक्सपर्ट की मानें तो पानी की कमी होने पर पशुओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे चारा खाने और उसे पचाने की क्षमता कम हो जाती है. शरीर के जरूरी पोषक तत्वा मल-मूत्र के जरिए बाहर निकलने लगते हैं. पशुओं की दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर असर पड़ने लगता है. खून गाढ़ा होने लगता है. बछड़े और बछड़ियों को पेचिस लग जाती है. बड़े पशुओं को दस्त लग जाते हैं.

पशुओं में पानी की कमी के लक्षण 

एक्सपर्ट का कहना है कि जब पशुओं में पानी की कमी हो जाती है तो कई तरह के लक्षण से इसे पहचाना जा सकता है. जैसे पशुओं को भूख नहीं लगती है. सुस्ती और कमजोर हो जाना. पेशाव गाढ़ा होना, वजन कम होना, आंखें सूख जाती हैं, चमड़ी सूखी और खुरदरी हो जाती है और पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और सबसे बड़ी पहचान ये है कि जब हम पशु की चमढ़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाते हैं तो वो थोड़ी देर से अपनी जगह पर वापस आती है. 

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