Animal Diet: ये होती है दुधारू पशु की पहचान, गाभि‍न होने पर खि‍लाएं ये खुराक 

Animal Diet: ये होती है दुधारू पशु की पहचान, गाभि‍न होने पर खि‍लाएं ये खुराक 

Animal Diet हर एक पशुपालक अपने पशु को भरपूर खुराक देने की कोशि‍श करता है, लेकिन जरूरत इस बात की होती है कि कौनसा चारा कितना देना है ये जान लेना बहुत जरूरी होता है. अगर गाभि‍न पशु को खुराक अच्छी मिलती है तो इससे गाय-भैंस की हैल्थ अच्छी रहेगी और बच्चा देने के बाद दूध उत्पादन भी खूब होगा. 

कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सकेकोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 10, 2026,
  • Updated Jun 10, 2026, 4:50 PM IST

हर एक पशुपालक नए पशुओं की खरीद-फरोख्त करता है. पशुपालक छोटा है तो साल-दो साल में एक बार पशु खरीदता है. वहीं अगर किसी पशुपालक के पास पशुओं की संख्या ज्यादा है तो वो लगातार नए दुधारू पशु खरीदता ही रहता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो होता ये कि जब कोई पशु दूध देना बंद कर देता है या बहुत ही कम कर देता है तो उसकी जगह नया पशु लाया जाता है. लेकिन नया दुधारू पशु खरीदना कोई आसान काम नहीं है. दूध उत्पादन देखने के साथ ही ये भी परखना होता है कि आने वाला नया पशु हेल्दी भी हो. 

उसे किसी तरह की कोई बड़ी बीमारी न हो. अगर पशु पहचानने में जरा सी चूक हुई नहीं की हजारों रुपये की चपत लग जाती है. वर्ना नए दुधारू पशु को खरीदकर घर लाने के बाद उसे कितनी भी खुराक खि‍लाते रहो उसका दूध उत्पादन नहीं बढ़ता है. इसी तरह से अगर बाड़े में गाभि‍न पशु है तो उसे भी खास खुराक की जरूरत होती है. सभी तरह का चारा उसकी खुराक में शामिल होना बहुत जरूरी होता है. 

गाभि‍न पशु को रोजाना दें ये खुराक

एनिमल एक्सपर्ट पशुपालकों को सलाह देते हैं कि गाभि‍न गाय हो या भैंस उसके लिए हर रोज हरा चारा 25 से 30 किलो, सूखा चारा चार से पांच किलो, खल एक किलो, नमक 30 ग्राम, मिनरल मिक्चर 50 ग्राम, संतुलित पशु आहार दो से तीन किलो खि‍लाना बहुत जरूरी है. वहीं पीने के लिए 75 से 80 लीटर पीने का साफ पानी भी होना चाहिए. 

दुधारू पशु की खरीद में ये रखें ख्याल 

  • शरीर आगे से पतला और पीछे से चौड़ा हो. 
  • त्वचा पतली और चिकनी के साथ ही पूंछ लम्बी हो.
  • आंखें उभरी और चमकदार के साथ ही पेट काफी विकसित हो. 
  • थन के चारों बाट एक समान लंबे और मोटे हों. 
  • दूध निकालते वक्त दूध की धार सीधे गिरती हो.
  • दुहने के बाद थन सिकुड़ जाते हों. 
  • पशु एक या दो बार बच्चा दे चुका हो. 
  • पशु के टीकाकरण-बीमारियों के बारे में पूरी जानकारी हो. 
  • दुधारू पशु का प्रजनन इतिहास पता हो. 

ऐसी होनी चाहिए पशु की खुराक 

हरा चारा

नेपियर घास, ज्वार, मक्का, बरसीम आदि उगाया जा सकता है. 

सूखा चारा 

इसमे गेहूं-धान का भूसा, सूखी घास शामिल है जो लम्बे वक्त तक चलती है और सुराक्षित भी रहती है. 

मिश्रण

ये एक पौष्टि क मिश्रण है, इसमे अनाज, खली, नमकर, मिनरल आदि मिलाए जाते हैं. 

साइलेज चारा 

इसमे हरे चारे को एक खास तकनीक अपनाकर टैंक, पोलीबैग में रखकर तैयार किया जाता है और ये लम्बे वक्त तक चलता है.  

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन
EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

MORE NEWS

Read more!