Animal Disease: तेज होती गर्मी में आपकी गाय-भैंस न हो जाएं बबेसियोसिस बीमारी की शिकार 

Animal Disease: तेज होती गर्मी में आपकी गाय-भैंस न हो जाएं बबेसियोसिस बीमारी की शिकार 

पैरासाइट पशुओं के खून में चिचड़ियों के माध्यम से प्रवेश कर जाते हैं और रक्त में जाकर लाल रक्त कोशिकाओं में अपनी संख्या बढ़ाने लगते है. इसी वजह से शरीर का हीमोग्लोबिन पेशाब के साथ बाहर निकलने लगता है. जिसके चलते पेशाब का रंग लाल या गहरे भूरे रंग का हो जाता है.

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 09, 2026,
  • Updated Jun 09, 2026, 1:36 PM IST

जून की गर्मी तो सब झेल ही रहे हैं, लेकिन अल नीनो के असर ने गर्मी से और ज्यादा डरा दिया है. खासतौर पर ऐसे पशुओं की ओर से जो अपनी परेशानी को खुद बता भी नहीं सकते हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो तेज गर्मी के बीच खासतौर पर गाय-भैंस में बबेसियोसिस बीमारी का खतरा बना रहता है. दूधारू पशुओं के लिए ये बीमारी खतरनाक मानी जाती है. गर्मी और बरसात के मौसम में गाय-भैंस पर ज्यादा अटैक करती है. इसकी एक खास वजह ये भी है कि बबेसियोसिस के कारक पैरासाइट ज्यादा गर्मी और ज्यादा नमी में तेजी से पनपते हैं. इस पैरासाइट के चलते पशुओं में खून की कमी होने लगती है. वहीं दूध उत्पादन घट जाता है. 

ऐसे में अगर वक्त रहते इस बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना गया, वक्त से पशु का इलाज शुरू नहीं हुआ तो कई बार पशु की मौत तक हो जाती है. गाय-भैंस में होने वाली किलनियों और चीचड़ भी बड़ी परेशानी है. और एक हकीकत ये भी है कि बबेसियोसिस बीमारी की वजह भी यही दोनों होते हैं. बबेसियोसिस की प्रजातियों में बबेसिया बोविस, बबेसिया मेजर, बबेसिया बाइजेमिया और बबेसिया डाईवरजेन्स शामिल हैं. इस बीमारी से दूध उत्पादन का घटना, ग्रोथ में कमी का होना आम है. 

ये हैं बबेसियोसिस के लक्षण

  • बबेसियोसिस के चलते पशु खाना-पीना छोड देता है. 
  • बबेसियोसिस की वजह से ही दूध उत्पादन घट जाता है. 
  • बबेसियोसिस से पीडि़त पशु को तेज बुखार आ जाता है.
  • खून की कमी, हदय की धड़कन बढ़ना और पीलिया हो जाता है. 
  • पीडि़त पशु लाल या फिर ब्रॉउन कलर का पेशाब करता है. 
  • बबेसियोसिस पीडि़त पशु को खूनी दस्त की शि‍कायत हो जाती है. 
  • बीमारी बढ़ने पर वक्त से इलाज नहीं मिले तो 90 फीसद केस में पशु की मौत हो जाती है. 

ऐसे कर सकते हैं बबेसियोसिस का इलाज

  • बबेसियोसिस संक्रमित पशु के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू कराएं.
  • अपने क्षेत्र में किलनियों-चिचढ़ो के प्रसार को रोकने के बारे में जागरुकता फैलाएं.
  • जो भी पशु थोड़ा भी बीमार दिखें तो उनके खून की जांच कराएं. 
  • पशुचिकित्सक की सलाह से डाईमिनेजीन, एसीट्‌यूरेट, ऑक्सीट्टासाइक्लिन एंटीबायोटिक और खून बढ़ाने वाली दवाई देनी चाहिए.

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