भारत के झींगा पालकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. अब एक बार फिर से भारत का झींगा अमेरिकी बाजारों में छा जाने के लिए तैयार है. करीब 6 महीने की उठा-पटक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ कम करने का ऐलान कर दिया है. ऐलान के बाद भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले आइटम पर सिर्फ 18 फीसद टैरिफ लगेगा. गौरतलब रहे भारत से एक्सपोर्ट होने वाले झींगा का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका को एक्सपोर्ट होता है. झींगा पालक और एक्सपर्ट की मानें तो अमेरिका की जनता तो भारतीय झींगा की दीवानी है.
इसकी एक बानगी ये है कि इक्वाडोर भारत से एक डॉलर सस्ता झींगा बेचता है, फिर भी अमेरिका हर साल भारत से साढ़े तीन से चार लाख टन तक झींगा खरीदता है. भारत झींगा उत्पादन में नौ लाख टन सालाना के आंकड़े के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि इक्वाडोर 15 लाख टन के साथ पहले स्थान पर है. फिर भी अमेरिका में भारत का झींगा ज्यादा बिकते हैं क्योंकि खारी मिट्टी और पानी के चलते भारतीय झींगा और इक्वाडोर के झींगा के स्वाद में फर्क है.
भारत से कितना झींगा एक्सपोर्ट होता है
- भारत हर साल 7 से 8 लाख टन झींगा एक्सपोर्ट करता है.
- 60 से 65 फीसद झींगा अमेरिका को एक्सपोर्ट होता है.
- भारत से चीन और यूरोपीय देशों को भी झींगा एक्सपोर्ट होता है.
- इक्वाडोर चीन को करीब 10 से 11 लाख टन झींगा एक्सपोर्ट करता है.
- इक्वाडोर अमेरिका को करीब डेढ़ लाख टन झींगा एक्सपोर्ट करता है.
मिट्टी-पानी के असर से खास बनता है झींगा
- पंजाब फिशरीज डिपार्टमेंट के असिस्टेंट डायरेक्टर कर्मजीत सिंह ने इसके लिए मानक बताए हैं.
- मछलियों की तरह से झींगा को भी एक खास मिट्टी-पानी चाहिए होता है.
- झींगा के लिए बहुत खारे पानी की जरूरत होती है.
- पानी में कम से कम पांच पीपीटी तक खारापन होना चाहिए.
- पानी में मैगनिशियम और पौटेशियम भी बहुत जरूरी है.
- पानी में पौटेशियम नहीं है तो उसे हम पानी में ऊपर से भी डाल सकते हैं.
- लेकिन पानी का खारापन तो प्राकृतिक ही होना चाहिए.
- खारा यानि नमक वाला पानी झींगा मछली के लिए अमृत जैसा है.
- जमीन के पानी में किसी भी तरह के बैक्टेरिया नहीं होते हैं.
- जमीन का खारा पानी झींगा के लिए पूरी तरह से प्योर होता है.
- पानी खारा है तो एक एकड़ के तालाब में चार टन तक झींगा का उत्पादन होता है.
- कुछ इसी तरह के मानक मिट्टी के लिए भी चाहिए होते हैं.
90 दिन में तैयार हो जाता है झींगा
- मौसम-तालाब साथ दे तो एक एकड़ में चार से साढ़े चार टन तक झींगा हो जाता है.
- मौसम-तालाब में फिर भी कमी रह जाए तो साढ़े तीन टन तक झींगा तैयार हो जाता है.
- तीन महीने में झींगा की फसल बिकने के लिए तैयार हो जाती है.
- 14 से 15 ग्राम का झींगा 90 दिन में तैयार हो जाता है.
- बाजार में 30 ग्राम वजन वाले झींगा की डिमांड भी है.
- 30 ग्राम वजन वाला झींगा 120 दिन में तैयार हो जाता है.
- दोनों के रेट में बाजार में 40 से 50 रुपये का अंतर आता है.
चुरू, राजस्थान में भी हो रहा झींगा उत्पादन
- चुरू, राजस्थान में झींगा उत्पादन हो रहा है.
- झींगा को 26 से 32 डिग्री तापमान वाला पानी चाहिए होता है.
- तालाब के पानी के तापमान और बाहरी तापमान में 5-6 डिग्री का अंतर रहता है.
- झींगा के तालाब के पानी का तापमान बनाए रखने के लिए कई तरह के उपकरण लगाए जाते हैं.
- इरेटर जैसे उपकरण पानी में मूवमेंट बनाते रहते हैं जिससे ऑक्सीजन की कमी नहीं होती है.
- पानी में मूवमेंट के चलते पानी जल्दी गर्म और ठंडा भी नहीं होता है.
- पानी और मिट्टी की जांच के लिए चुरू में एक लैब बनाई गई है.
- 68 करोड़ रुपये की लागत से ये लैब तैयार की गई है.
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