Lumpy and Cow: बरसात के दौरान गायों को लंपी से बचाना है तो अपनाएं ये खास उपाय

Lumpy and Cow: बरसात के दौरान गायों को लंपी से बचाना है तो अपनाएं ये खास उपाय

Lumpy and Cow सिर्फ लंपी ही नहीं हर तरह की बीमारी से दुधारू पशुओं को बचाया जा सकता है, अगर साइंटिफिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो. क्योंकि पुराने तौर-तरीकों से पशुपालन करने के चलते ही पशु जल्दी-जल्दी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. क्लाइमेट चेंज को देखते हुए आज बॉयो सिक्योरिटी वक्त की जरूरत है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 03, 2026,
  • Updated Jul 03, 2026, 11:12 AM IST

लंपी एक जानलेवा बीमारी है. खासतौर पर ये गायों पर अटैक करती है. क्योंकि ये एक संक्रमण बीमारी है तो बरसात में गायों पर इसका अटैक ज्यादा होता है. अब मॉनसून का मौसम शुरू हो चुका है. हर रोज कहीं न कहीं बारिश हो रही है. बारिश होने के बाद पशुओं के शेड में भी जलभराव हो जाता है. गोबर-मिट्टी कीचड़ की शक्ल ले लेते हैं. जहां पर मच्छर और मक्खी पनपने लगते हैं. बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (बासु) के वाइस चांसलर का कहना है कि लंपी बीमारी मच्छर और मक्खिं‍यों के चलते ही फैलती है. लेकिन इसकी रोकथाम भी की जा सकती है. 

अगर वक्त रहते गायों का वैक्सीनेशन करा दिया जाए और पशुओं के बाड़े में बॉयो सिक्योरिटी के नियमों का पालन किया जाए तो गाय लंपी की चपेट में नहीं आएगी. वहीं साइंटीफिक तरीके से किया गया पशुपालन पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी पशुओं की बीमारी से सुरक्षित रखता है. अगर आंकड़ों की मानें तो इंसानों को 70 से 75 फीसद बीमारियां पशुओं से लगती हैं, जिन्हें हम जूनोटिक कहते हैं. 

इसलिए जरूरी है बॉयो सिक्योरिटी 

बासु के वाइस चांसलर डॉ. इन्द्रजीत सिंह की मानें तो हम आज तक पशुपालन को अपने पुराने तौर-तरीके अपनाकर करते चले आ रहे हैं. जबकि क्लाइमेट चेंज के चलते अब बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है. सबसे पहले तो हमे करना यह होगा कि हम गाय-भैंस पालें या भेड़-बकरी समेत कोई भी दुधारू पशु, हमे उसे साइंटीफिक तरीके से पालना होगा. इसके लिए जरूरत है कि हम अपने पशुओं के फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी का पालन करें और आने वाले से भी कराएं.

जैसे अपने फार्म की बाड़बंदी करें. जिससे सड़क पर घूमने वाला कोई भी जानवर आपके फार्म में नहीं घुस सकें.अपने फार्म के अंदर और बाहर दवा का छिड़काव जरूर कराएं. दूसरा यह कि कुछ दवा फार्म पर रखें जिनका इस्तेमाल हाथ साफ करने के लिए हो. ऐसा करने के बाद ही पशु को हाथ लगाएं.

पशु को हाथ लगाने के बाद एक बार फिर से दवाई का इस्तेमाल कर हाथ साफ करें, जिससे पशु की कोई बीमारी आपको न लगे. इतना ही नहीं अगर कोई व्यकतिा बाहर से आपके फार्म में आ रहा है तो उसके शूज बाहर ही उतरवाएं या फिर उन्हें सेनेटाइज करें. हाथ और उनके कपड़ों को भी सेनेटाइज करवा सकें तो बहुत ही अच्छां है वर्ना तो पीपीई किट पहनाकर ही फार्म के अंदर ले जाएं. 

छुट्टा गायों पर ज्यादा होता है अटैक 

डॉ. इन्द्रंजीत सिंह का कहना है कि सड़क पर घूमने वालीं और कुछ गौशालाओं में गायों को खाने के लिए पौष्टिक चारा नहीं मिल पाता है. जिसके चलते ऐसी गायों की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. यही वजह है कि लंपी बीमारी का सबसे ज्यादा अटैक इसी तरह की गायों पर देखा गया. लंपी की वजह से मौत भी ऐसी ही गायों की हुई. ऐसा नहीं है कि जहां गायों को बहुत अच्छा चारा मिल रहा है वहां गायों की मौत लंपी की वजह से नहीं हुई है, हुई है लेकिन उसकी संख्या बहुत कम है.

दूसरा यह कि सड़क पर घूमने वाली गाय बहुत जल्दी उन मक्खी-मच्छर की चपेट में आ गईं जो लंपी बीमारी के कारण थे. जबकि गौशालाओं और डेयरी फार्म पर बहुत हद तक साफ-सफाई होने के चलते मच्छर-मक्खी का उतना अटैक वहां नहीं हुआ.

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन

EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

MORE NEWS

Read more!