Goat Disease: बरसात के दिनों में बकरे-बकरियों को बहुत परेशान करती हैं ये बीमारी

Goat Disease: बरसात के दिनों में बकरे-बकरियों को बहुत परेशान करती हैं ये बीमारी

Goat Disease हरे चारे में शामिल बहुत सारे पेड़-पौधों की पत्तियां दवाई का काम करती हैं. इन पेड़-पौधों की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से दवाईयों के गुण मौजूद होते हैं. ये खुद केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है. वहीं अगर बकरे-बकरियों के हरे चारे में मामूली सा बदलाव कर दिया जाए तो कई बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. 

थर्ड फ्लोर पर अचानक पहुंच गई बकरी. (File Photo: ITG)थर्ड फ्लोर पर अचानक पहुंच गई बकरी. (File Photo: ITG)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 30, 2026,
  • Updated Jun 30, 2026, 5:46 PM IST

पशुओं के लिए वैसे तो बरसात का मौसम तमाम बीमारियां लेकर आता है, लेकिन एक खास बीमारी ऐसी है जो जानलेवा साबित होती है. ये बीमारी खासतौर पर छोटे पशु जैसे भेड़-बकरियों को होती है. ये बकरियों को होने वाली पेट संबंधी बीमारियों से जुड़ी हुई है. ये बीमारी दूषि‍त पानी पीने और दूषि‍त हरा चारा खाने के चलते होती है. इस बीमारी के वैसे तो बहुत सारे लक्षण हैं, लेकिन एक बड़ा लक्षण ये है कि आप पीडि़त बकरी को कितना भी चारा खिला लो, लेकिन न तो बकरी की ग्रोथ होगी और न ही उसका उत्पादन बढ़ेगा. यहां तक की ये बीमारी बकरी के प्रजनन काल को भी प्रभावित करती है. 

ये बीमारी पेट में कीड़े होने के नाम से जानी जाती है. अगर बकरी पालक थोड़े से जागरुक हो जाएं तो इस खतरनाक बीमारी की रोकथाम की जा सकती है. वहीं अगर गोट एक्सपर्ट की मानें तो उत्पादन करने वाले पशुओं के लिए हरा चारा संजीवनी माना जाता है. हरे चारे में दवाईयों के गुण होते हैं. ऐसे बहुत सारे पेड़-पौधे हैं जिनके हरे पत्ते खिलाने से बकरियों को दवाई खिलाने की जरूरत नहीं पड़ती है. 

इस पेड़ के पत्ते हैं पेट के कीड़ों की दवाई 

सीआईआरजी के गोट साइंटिस्ट का कहना है कि अमरुद, नीम और मोरिंगा में टेनिन कांटेंट और प्रोटीन की मात्रा बहुत होती है. अगर वक्त पर हम तीनों पेड़-पौधे की पत्तियां बकरियों को खिलाते हैं तो उनके पेट में कीड़े नहीं होंगे. पेट में कीड़े होना बकरे और बकरियों में बहुत ही परेशान करने वाली बीमारी है. पेट में अगर कीड़े होंगे तो उसके चलते बकरे और बकरियों की ग्रोथ नहीं हो पाएगी. पशुपालक जितना भी बकरे और बकरियों को खिलाएगा वो उनके शरीर को नहीं लगेगा. खासतौर पर जो लोग बकरियों को फार्म में पालते हैं और स्टाल फीड कराते हैं उन्हें इस बात का खास ख्याल रखना होगा. 

अगर आप बकरे-बकरियों को फार्म में पालते हैं. उन्हें खुले मैदान और जंगल में चरने का मौका नहीं मिल पाता है. नीम, अमरुद, मोरिंगा आदि पेड़-पौधे की पत्तियां आपको आसपास नहीं मिल पाती हैं तो इसमे परेशान होने की बात नहीं है. सीआईआरजी ऐसे पत्तों की दवाई बाजार में बेच रहा है.

बकरी के बच्चों को खि‍लाएं नीम गिलोय 

अगर हम खुले मैदान में या फिर किसी जंगल में जाएं तो हमे नीम गिलोय दिख जाएगा. यह नीम के पेड़ पर ही पाया जाता है. शायद इसीलिए इसे नीम गिलोय भी कहा जाता है. स्वाद में यह कड़वा होता है. अगर हम नीम गिलोय की पत्तियां बकरी के बच्चों को खिलाएं तो उनके शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत आ जाएगी. यह बच्चे जल्द ही बीमार भी नहीं पड़ेंगे. जिसके चलते पशुपालक बकरियों की मृत्य दर को कम कर सकेंगे. यह हम सभी जानते हैं कि बकरी पालन में सबसे ज्यादा नुकसान बकरी के बच्चों की मृत्य दर से ही होता है.

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