वैसे तो हर मौसम में पशुओं के लिए उसके हिसाब से देखभाल करनी होती है. खुराक में बदलाव किया जाता है. यहां तक की पशुओं के शेड को भी मौसम के हिसाब से तैयार किया जाता है. खासतौर पर बरसात का मौसम. ये वो मौसम है जो बहुत सारी संक्रमण वाली बीमारियां लेकर आता है. और इससे भी ज्यादा खतरे वाली बात ये कि पशुओं के शेड में कीड़े-मकोड़े और सांप, कांतर और बिच्छू का खतरा बढ़ जाता है. जहरीले कीड़े तो कई बार पशुओं को काट भी लेते हैं.
वहीं इन दिनों में पशुओं का दूध उत्पादन घटने की संभावना भी ज्यादा रहती है. एनिमल एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि खासतौर पर जब बरसात हो रही हो तो एनिमल शेड में कुछ उपाय करना बहुत जरूरी हो जाता है. सुबह-शाम सफाई के साथ ही दवाईयों का छिड़काव और कीड़ों को भगाने के उपाय किए जाएं.
बरसात में एनिमल शेड की हालत
- बरसात के दिनों में चारों ओर पानी भरा रहता है.
- ऐसे में जमीन के अंदर या आसपास रहने वाले कीड़े-मकोड़े सुराक्षित जगह तलाशते हैं.
- कई बार ये पशुओं के शेड में भी आ जाते हैं.
- अक्सर देखा होगा कि मेढक भी पशु शेड में आ जाता है.
- जहां मेढक का ठिकाना होता है वहां पीछे-पीछे सांप भी पहुंच जाता है.
- क्योंकि सांप मेढक के शिकार का शौकीन करता है.
- शेड में सांप को देखकर गाय-भैंस ही नहीं भेड़-बकरी भी डरते हैं.
बरसात में ऐसे करें शेड मैनेजमेंट
- बरसात के दिनों में हर रोज शाम को पशु शेड से सभी पशुओं को बाहर कर दें.
- शेड में सूखी घास, कड़वे नीम की पत्तियां, तुलसी, तेज पत्ता जलाकर शेड में धुंआ करें.
- ऐसा करने से शेड में मौजूद सभी कीड़े-मकोड़े बाहर निकल जाएंगे.
- पशु शेड में फर्श का ढलान ऐसा रखें कि बरसात के दिनों में भी पानी नहीं भरे.
- कई बार बरसात के दौरान शेड में किसी न किसी वजह से पानी भर जाता है.
- शेड में जहां पानी भरा हो तो उसके ऊपर डीजल या मिट्टी के तेल की कुछ बूंदे डाल दें.
- ऐसा करने से पानी में पनपने वाले मच्छर-मक्खी और दूसरे कीट-पतंगे पशुओं को परेशान नहीं करेंगे.
- मच्छर-मक्खी गाय-भैंस के ऊपर बैठकर उन्हें परेशान करते हैं और पशु तनाव में आ जाता है.
- इस सब से बचने के लिए बरसात से पहले पशु शेड की छत को सही करा लें.
- जहां से भी पानी टपकने की संभावना हो या फिर जहां से पानी टपक रहा हो तो उसे सही करा लें.
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