Cow Disease: देखते ही देखते गायों की जान ले लेता है बोटुलिज्म बैक्टीरिया, जानें वजह 

Cow Disease: देखते ही देखते गायों की जान ले लेता है बोटुलिज्म बैक्टीरिया, जानें वजह 

Cow Disease एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं को बोटुलिज्म बैक्टीरिया से बचाने के लिए उनकी खुराक में मिनरल मिक्चर, हरा और सूखा चारा जरूरत के हिसाब से शामिल किया जाए. इतना ही नहीं साफ और ताजा पानी पीने को दिया जाए. इससे होगा ये कि पशुओं के शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होगी और वो दूषि‍त चीजों को खाने की कोशि‍श नहीं करेंगी. 

गौसेवा के दावों पर सवाल (सांकेतिक तस्वीर)गौसेवा के दावों पर सवाल (सांकेतिक तस्वीर)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 01, 2026,
  • Updated Jul 01, 2026, 12:09 PM IST

गाय के आगे के दोनों पैर जकड़ रहे हैं. मुंह से बहुत ज्यादा लार टपक रही है. धीरे-धीरे गाय का शरीर कमजोर पड़ रहा है. फिर एक दिन ऐसा आता है कि गाय कमजोरी के चलते उठ नहीं पाती है. पैर भी उसके ठीक से काम नहीं करते हैं. ये वो वक्त होता है जब गाय एक ही जगह बैठे-बैठे चारा खाती रहती है और पानी पीती है. और इस तरह देखते ही देखते 8 से 10 दिन में गाय दम तोड़ देती है. और अफसोस की बात ये है कि गायों की इस बीमारी के इलाज के नाम पर सिर्फ उपाय हैं. 

क्योंकि जिस बोटुलिज्म बैक्टीरिया के चलते ये परेशानी होती है उसका अभी न तो कोई इलाज है और न ही कोई वैक्सीन है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी और बरसात के मौसम में ये बैक्टीरिया बहुत जल्दी असर करता है. बोटुलिज्म बैक्टीरिया के केस किसी भी राज्य में देखने को मिल सकते हैं, लेकिन खासतौर पर राजस्थान में इसके केस ज्यादा देखने को मिलते हैं. 

इस तरह हो जाती है गायों की मौत 

एनिमल एक्सपर्ट डा. ऊमैश वैगंटीयार का कहना है कि गर्मी के दिनों में खासतौर पर जहां हरे चारे की कमी हो जाती है. गायों को पीने के लिए साफ और ताजा पानी नहीं मिलता है. पशु भूखे-प्यासे यहां-वहां घूमते हैं. इन सब वजहों के चलते ही पशुओं के शरीर में कैल्शियम समेत दूसरे मिनरल्स की कमी हो जाती है. और फिर होता ये है कि जब पशु को टहलते हुए खुले मैदान में कोई मृत पशु दिखाई देता है तो वो उसकी हड्डी खाने लगता है या फिर उसके सड़े हुए शव को चाटता है. और खासतौर पर गाय जब ऐसा कर रही होती है तो उसके शरीर में बोटुलिज्म बैक्टी़रिया दाखिल हो जाता है. यही बैक्टीरिया गायों को बीमार करता है. 

बोटुलिज्म से ऐसे बचेगी गायों की जान 

सैकड़ों गायों की मौत के सवाल पर डा. ऊमैश वैगंटीयार का कहना है कि अभी इस बीमारी का कोई टीका नहीं बना है. और ना ही कोई इलाज है. लेकिन हां, इतना जरूर है कि अगर पशुपालक जागरुक रहें तो गायों की मौत का टाला जा सकता है. करना ये है कि जब किसी भी पशु की मौत हो जाए तो उसके शव का अच्छी तरह जमीन के अंदर दफन कर दें. और खास ख्याल रहे कि ऐसा करते वक्त ये देख लें कि जहां मृत पशु को दफन किया जा रहा है उसके आसपास तालाब या पोखर ना हो जहां पशु पानी पीने आते हों. इतना ही नहीं चारागाह की जमीन पर भी मृत पशु को नहीं दफनाना चाहिए.  

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