
भारत एक ऐसा देश है हां विश्व के किसी भी दूसरे देश के मुकाबले सबसे ज्यादा पशु यानि गाय-भैंस हैं. एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक देश में दुधारू पशुओं की संख्या करीब 30 करोड़ है. दूध उत्पादन में देश विश्व में नंबर वन है. मीट उत्पादन के मामले में हम 5वें नंबर पर हैं. लेकिन बावजूद इसके हम डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में बहुत पीछे हैं. हमारा डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट का आंकड़ा बहुत छोटा है. हालांकि इसके पीछे कई बड़ी वजह हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह है पशुओं को होने वाली बीमारियां. खासतौर पर खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी के चलते. इसी से निपटने के लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर नौ बड़े राज्यों को एफएमडी फ्री बनाने की कोशिश कर रही है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो सभी नौ राज्यों के एफएमडी फ्री घोषित होते ही यहां के पशुपालक और डेयरी सेक्टर की किस्मत खुल जाएगी. सीरो-सर्विलांस के आधार पर कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात को एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी चल रही है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो एनिमल प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट बढ़ाने में इससे काफी मदद मिलेगी. लेकिन इस पर वर्ल्ड एनिमल हैल्थ ऑर्गेनाईजेशन की मुहर लगना भी जरूरी होता है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्थय केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें.
एनिमल एक्सपर्ट बताते हैं कि एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.
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