
पोल्ट्री मीट की बात करें तो पहले नंबर पर चिकन आता है. ये सिर्फ भारत ही नहीं विश्वभर में भी चिकन को पसंद किया जाता है. देश में चिकन के बाद दूसरे नंबर पर आती है बटेर. हालांकि चिकन के मुकाबले अभी भी बटेर का आंकड़ा बहुत कम है, लेकिन लगातार इसका आंकड़ा बढ़ रहा है. पोल्ट्री मीट में बटेर को भी खूब पसंद किया जा रहा है. बाजार में बटेर के मीट ही नहीं अंडों की भी खूब डिमांड है. बटेर का मीट बाजार में महंगा बिकता है. डिमांड और महंगा होने के चलते बटेर पलकों को इस कारोबार में अच्छा मुनाफा मिल जाता है.
बटेर पालन भारत में एक तेजी से बढ़ता कारोबार बन रहा है. यह कारोबार कम लागत और कम जगह में होने के चलते लोगों की पसंद बन रहा है. राज्य की पोल्ट्री पॉलिसी और जरूरी लाइसेंस के बाद इसे शुरू किया जा सकता है. सिर्फ 50 हजार रुपये की मामूली लागत पर इसे शुरू कर सकते हैं. अगर सर्दियों में बटेर से मुनाफा कमाना है तो अभी से इसकी तैयारी शुरू की जा सकती है.
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राज नारायण का कहना है कि बटेर का इस्तेमाल सिर्फ मीट और अंडे के लिए ही नहीं किया जाता है. बटेर से करीब पांच से छह तरह के प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. लेकिन बटेर से प्रोडक्ट बनाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत होती है. बरेली में ये ट्रेनिंग दी जाती है. बटेर के अंडे का अचार बहुत अच्छी रेसिपी मानी जाती है. बटेर का मीट चिकन बहुत महंगा मिलता है. चिकन दो से ढाई सौ रुपए किलो तक मिल जाता है. जबकि बटेर का मीट एक हजार रुपये से लेकर से 1200 रुपये किलो तक बिकता है. हालांकि मौसम के हिसाब से इसके दाम घटते-बढ़ते रहते हैं.
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