AL Nino: अल नीनो से खेत में फसल ही नहीं भेड़-बकरियों की सेहत भी बिगड़ेगी ऐसे करें बचाव 

AL Nino: अल नीनो से खेत में फसल ही नहीं भेड़-बकरियों की सेहत भी बिगड़ेगी ऐसे करें बचाव 

AL Nino एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो चराई के दौरान खुले मैदान में ऐसी-ऐसी खरपतवार होती हैं जो पशुओं को अंधा करने के साथ ही उनकी जान भी ले लेती हैं. खरपतवार पशुओं को शारीरिक रूप से तो नुकसान पहुंचाती ही है, साथ में उनके दूध, मीट और ऊन उत्पादन को भी प्रभावित करती है. 

बीते साल की तुलना में चना का रकबा 4 लाख हेक्टेयर कम है.बीते साल की तुलना में चना का रकबा 4 लाख हेक्टेयर कम है.
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 25, 2026,
  • Updated Jun 25, 2026, 9:00 AM IST

कम बारिश जमीन की नमी को कम कर देती है. और इसका बुरा प्रभाव ये देखने को मिलता है कि खरपतवार ज्यादा पनपने लगती है. और जब खेतों में खरपतवार ज्यादा होती है तो उसका फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है. खरपतवार खासतौर से धान को बहुत नुकसान पहुंचाती है. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि खरपतवार खेत में सिर्फ फसलों को ही नुकसान पहुंचाती है. खरपतवार की वजह से भेड़-बकरियों की सेहत भी खराब होती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो खरपतवार खाने से या फिर सिर्फ शरीर पर चिपकने का असर भी भेड़-बकरियों में देखने को मिलता है. 

खरपतवार पशुओं को बाहरी और अंदरुनी तौर पर, दोनों ही तरीकों से नुकसान पहुंचाती है. खरपतवार की पत्तियां, फल और उसके बीज पशु के शरीर पर चिपकर भी उसे नुकसान पहुंचाते हैं. कई बार कुछ खरपतवार की पत्तियां तो पशुओं की आंखों की रोशनी तक को प्रभावित कर देती हैं. कई-कई दिन तक शरीर से चिपकी खरपतवार भेड़-बकरी के रेशे को भी नुकसान पहुंचाती है. 

भेड़-बकरियों को होंगे ये नुकसान 

  • लैंटाना कैमरा की पत्तियां खाने से पशु पीलिया का शिकार हो जाता है. साथ ही आंखों पर भी इसका गहरा असर पड़ता है. 
  • गाजर घास के संपर्क में आने से पशु को खुजली हो जाती है. शरीर पर सूजन आ जाती है. एलर्जी का शिकार भी हो जाता है. 
  • कॉकलेबर या छोटा धतूरा खाने पर ये पशु के लीवर पर अटैक करता है. जिसके चलते पशु को पीलिया भी हो जाता है. किडनी और पशु के हॉर्ट पर भी असर डालता है. 
  • जॉनसन घास जहरीली होती है. इसका असर पशु के पूरे शरीर पर देखने को मिलता है. 
  • पंक्चरवाइन खरपतवार सूखे इलाके में होती है. इस वजह से इसका सबसे ज्यामदा शिकार भेड़ होती हैं. ये भेड़ों की आंखों की रोशनी पर असर डालती है. खुरों में घाव कर देती है. इतना ही नहीं पशुओं के शरीर में पंक्चर कर देती है. पेट को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है. 
  • जैंथियम स्ट्रैखमारियम का फल पशुओं के शरीर पर चिपक जाता है. क्यों कि ये फल कांटेदार होता है तो इसके चलते पशुओं को बहुत परेशानी उठानी पड़ती है. 
  • एस्ट्रातग्लाओस खरपतवार खासतौर पर राजस्थान में होती है. अगर गर्भवती भेड़ और बकरी इसे खा ले तो उनका गर्भपात हो जाता है. 
  • रोडो डेंड्रोन खरपतवार कश्मीैर में होती है. अगर इसे भेड़ या बकरी खा ले तो उन्हेंड दस्तफ लग जाते हैं. साथ ही ये उनके दूध और खून पर भी असर डालता है. 
  • पत्ते्दार स्पेरेज के खाने से भी पशुओं को दस्त लग जाते हैं. ये कमजोरी भी पैदा करता है. खासतौर पर ये भेड़ के लिए बहुत ही ज्याखदा खतरनाक माना जाता है. 
  • सूखे की स्थिखति होने पर चेनोपोडियम खरपतवार पनपने लगती है. इसमे नाइट्रोजन की मात्रा एक हजार पीपीएम तक पहुंच जाती है. और जब पशु इसे खाता है तो उसे सांस की बीमारी हो जाती है. 
  • नीटल खरपतवार के बाल से पशुओं में खुजली होने लगती है. 
  • भेड़-बकरी और याक से ऊन मिलती है. लेकिन जैन्थियम स्पेसिस खरपतवार जब इनके शरीर से चिपकती है तो उनके शरीर पर मौजूद रेशे को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती रहती है. 

ये भी पढ़ें: 

Milk Production: गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद इन 5 कारणों से कम हो सकता है दूध उत्पादन

EL-Nino: डेयरी-पशुपालन पर बढ़ा अल नीनो का खतरा, कम हो सकता है दूध उत्पादन!

MORE NEWS

Read more!