
पानी की मिलावट तक तो लोग खामोश थे. लेकिन यूरिया, कैमिकल और भी न जानें दूध में क्या-क्या मिलाया जा रहा है. खबर तक यहां तक की दूध में मिलावट तो छोडि़ए, पूरा का पूरा नकली दूध ही तैयार किया जा रहा है. ये वो खबरें हैं जो दूध पीने और दूध से बने प्रोडक्ट खाने वालों को डराती हैं. दूध में मिलावट के इसी खेल पर रोक लगाने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) अब सिर्फ शहरों में ही नहीं गांव-गांव जाकर खाने-पीने की चीजों के सैम्पल ले रही है.
सड़कों पर दौड़ते हुए सैम्पल भरे जा रहे हैं. FSSAI की फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स सड़क पर भी फूड सैम्पल भर रही है. हाईटेक यूनिट गांवों में दूध और दूध से बने प्रोडक्ट की जांच कर रही है. यूनिट में लगी मिल्क-ओ-स्क्रीन दूध में कई तरह की जांच कर रही है. अभी तक देश के 35 राज्यों में ये यूनिट काम कर रही हैं.
सरकार ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के नियमों के तहत खाद्य व्यवसाय संचालक (FBO) के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. खासतौर से वो संचालक जो कच्चे माल की खरीद से लेकर उपभोक्ताओं तक तैयार माल की डिलीवरी करते हैं. ऐसे संचालकों को फूड प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी तय करनी होगी.
फूड से जुड़ी पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए संचालकों को आपूर्ति श्रृंखला में उचित रिकॉर्ड और दस्तावेज रखने होंगे. निरीक्षण और ऑडिट के दौरान जरूरत पड़ने पर ये दस्तावेज पेश करने होंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो उल्लंघन के मामले में उचित नियामक कार्रवाई की जा सकती है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक और खाद्य योजक) विनियम, 2011 के अंतर्गत दूध और दूध से बने प्रोडक्ट के लिए मानक स्थापित किए हैं. मानकों का अनुपालन तय कराने के लिए पूरे देश में डेयरी सहकारी समितियों समेत सभी खाद्य व्यवसाय संचालन (FBO) पर समान रूप से लागू होते हैं.
नए मानक विकसित करते समय या मौजूदा मानकों में संशोधन करते समय, FSSAI आम जनता और हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझाव मांगने के लिए मसौदा अधिसूचनाएं जारी करता है. डेयरी सहकारी समितियों से इनपुट सहित प्राप्त फीडबैक की मानक-निर्धारण प्रक्रिया के दौरान गहन समीक्षा और विचार किया जाता है.
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