
देशभर में फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) अनाज स्टोर करती है. इसके लिए उसके पास खुद के बड़े-बड़े स्टोर हैं. बावजूद के बड़ी मात्रा में अनाज खुले में भी पड़ा रहता है. हालांकि इसे एफसीआई की भाषा में कवर्ड एंड प्लिंथ (CAP) कहा जाता है. कैप भी अनाज को स्टोर करने का ही एक साइंटीफिक तरीका है. लेकिन खुद एफसीआई के ही कर्मचारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि अनाज को खुले में स्टोर नहीं किया जाए. FCI कर्मचारी संघ (CITU) ने ये मांग उठाई है. उनका आरोप है कि केरल जैसे राज्य में तो कैप के तहत अनाज को स्टोर करना बिल्कुल भी संभव नहीं है.
यहां मौसम के बारे में कोई भी सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है. कर्मचारी संघ की इस मांग को राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी समर्थन दिया है. संघ ने सरकार से ये भी मांग की है कि अनाज स्टोर करने के लिए पुराने तौर-तरीकों को हटाकर नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए गोदाम और साइलो तैयार किए जाएं.
FCI कर्मचारी संघ की मांगों हाल ही में राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री के सामने रखा है. केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराया गया है कि अनाज के लिए खुले में स्टोरेज की लगातार निर्भरता बढ़ रही है. क्योंकि एफसीआई के पास वैज्ञानिक स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. संघ ने चेतावनी दी है कि खुले स्टोरेज में अनाज रखने से गंभीर जोखिमों, खासकर भारी बारिश और अधिक नमी वाले क्षेत्रों में खतरा बढ़ रहा है. इसके लिए जरूरी है कि अनाज के कीमती स्टॉक को खराब और बर्बाद होने से बचाने के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप करते हुए इसका रास्ता निकाला जाए.
ढके हुए स्टोरेज स्पेस की भारी कमी और खरीद की बढ़ती मात्रा में वृद्धि ने FCI को देश भर में CAP स्टोरेज का सहारा लेने के लिए मजबूर किया है. हालांकि, कई राज्यों, विशेषकर केरल में मौसम की स्थिति खुले स्टोरेज को बहुत अनुपयुक्त बनाती है और लंबे मानसून के मौसम में नुकसान का खतरा बना रहता है. संघ ने अनाज खराब होने पर ऑडिट एजेंसियों जैसे भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के बारे में भी बताया कि कैसे खुली जगहों पर रखे गए अनाज के खराब होने से हुए भारी नुकसान के बारे में रिपोर्ट तैयार की गई हैं.
ये सब इसलिए भी हो रहा है कि एफसीआई में कर्मचारियों की संख्या कम हो गई है. नियमित रखरखाव, फ्यूमिगेशन और संरक्षण जैसे काम नहीं हो पा रहे हैं. इसलिए जरूरी है कि पुराने सिस्टम को खत्म कर स्टील साइलो, मशीनीकृत गोदामों और जलवायु-नियंत्रित स्टोरेज सुविधाओं जैसी आधुनिक वैज्ञानिक स्टोरेज प्रणालियों को अपनाया जाए.
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