
‘पोल्ट्री सेक्टर हर साल सात से आठ फीसद की रेट से तरक्की कर रहा है. करीब सवा दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार वाला ये सेक्टर देश की जीडीपी में भी खास योगदान दे रहा है. इतना ही नहीं देश की फूड सिक्योरिटी भी पोल्ट्री के अंडे-चिकन का अहम रोल है. इससे ज्यादा प्रोटीन सोर्स वाला कोई और प्रोडक्ट नहीं है. वो भी कम दाम पर. देश के करीब 10 करोड़ लोग इस सेक्टर से जुड़े हुए हैं. लेकिन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) में पोल्ट्री से कोई नहीं है. पोल्ट्री सेक्टर बहुत काम कर रहा है, लेकिन सरकारों तक हमारी बात पहुंचती ही नहीं है.
डेयरी और फिशरीज के लिए सरकार खूब काम कर रही है.’ ये कहना है ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और आईबी ग्रुप के एमडी बहादुर अली का. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि एक कमी पोल्ट्री सेक्टर की भी है कि हम सरकार को सेक्टर से जुड़ा एक आंकड़ा नहीं दे पा रहे हैं. इसी को देखते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन पोल्ट्री एसोसिएशन (PI-CIPA) बनाई गई है.
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प्रेसिडेंट बहादुर अली का कहना है कि पोल्ट्री सेक्टर में फीड के तौर पर मक्का और सोयाबीन का खूब इस्तेमाल होता है. 60 फीसद से ज्यादा मक्का पोल्ट्री फीड में खप जाती है. लेकिन बीते कुछ वक्त से पोल्ट्री फार्मर मक्का को लेकर खासा परेशान है. मक्का के दाम बढ़ने के साथ ही बाजार में उसकी उपलब्धता को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस सब के चलते पोल्ट्री फीड के दाम बढ़ गए हैं. जबकि पोल्ट्री प्रोडक्ट अंडे और चिकन के दाम में कोई अंतर नहीं आया है. लागत बढ़ गई, लेकिन मुनाफा नहीं बढ़ा है. इसी सब के चलते सरकार से गुहार लगाई गई है कि मक्का इंपोर्ट करने की अनुमति दी जाए. सरकार से की गई इस डिमांड को भी काफी टाइम हो चुका है. लेकिन अभी तक इस बारे में कोई सुनवाई नहीं हुई है.
IPEMA के प्रेसिडेंट उदय सिंह ब्यास ने बताया कि देशभर में 30 से ज्यादा पोल्ट्री सेक्टर से जुड़ी एसोसिएशन हैं. लेकिन कई बड़े मुद्दों पर अब सभी एसोसिएशन की आवाज PI-CIPA के मंच से उठेगी. हम पोल्ट्री इंडिया एक्सपो-2024 से होने वाले मुनाफे का करीब 50 फीसद हिस्सा नए मंच PI-CIPA को आवंटित करने जा रहे हैं. इस नए मंच में सभी राज्य स्तरीय पोल्ट्री एसोसिएशन शामिल होंगे. हम उन्हें अंडे और चिकन मीट की खपत को बढ़ावा देने और उसके समर्थन में अभियान चलाने के लिए हर तरह से मदद करेंगे.
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