
जनवरी का महीना खत्म हो चुका है. लेकिन ठंड का असर अभी कम नहीं हुआ है. मौसम बार-बार अपना रंग बदल रहा है. एकदम से निकली चमकती धूप को देखकर लगता है कि अब ठंड कम हो जाएगी. लेकिन हल्की सी बारिश और सुबह-शाम में कोहरे के चलते तापमान फिर से गिर जाता है. इस तरह का मौसम जितना इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाला होता है, उतना ही पशुओं को भी परेशान करता है. खासतौर से इसके चलते पशुओं का उत्पादन कम हो जाता है. नए जन्म लेने वाले बछड़ों के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल होती है. दूध के अलावा पशुपालन में बछड़ों से भी बड़ा मुनाफा होता है, इसलिए एनिमल एक्सपर्ट साइंटीफिक तरीके से पशुपालन करने की सलाह देते हैं.
अगर साइंटीफिक तरीके से बछड़ों का पालन किया तो उन्हें दूध उत्पादन के लिए बाड़े में शामिल किया जा सकता है. इतना ही नहीं बड़ा करके उन्हें बाजार में भी बेच सकते हैं. सर्दियों के मौसम में गाय-भैंस के बछड़े होते ही उसे ठंड से बचाने के लिए जरूरी देखभाल की जरूरत होती है. अगर इसमें जरा सी भी लापरवाही बरती गई तो बच्चे की जन्म के साथ ही मौत भी हो सकती है. और देखभाल मानकों के मुताबिक की जाए तो बच्चा छह महीने का होते ही मुनाफा देने वाला बन जाता है.
10 दिन की उम्र पर बच्चे को पेट के कीड़ों की दवा जरूर पिला दें.
पेट के कीड़ों की दूसरी खुराक बच्चे को 21 दिन की उम्र पर पिलाएं.
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