प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है. इस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल खराब होने पर राहत देना है. लेकिन अब उसी योजना को लेकर उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में करोड़ों का घोटाला सामने आया है. किसानों की मेहनत और भरोसे के साथ बीमा कंपनी ने ऐसा खेल खेला कि अन्नदाता खुद ठगा महसूस कर रहे हैं. अब इस मामले में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है और बीमा कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. हालांकि किसान आरोपियों को जेल भेजने की मांग को लेकर आंदोलित हैं.
दरअसल उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में वित्तीय वर्ष खरीफ 2024 के दौरान इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर आरोप है कि उसने किसानों की भूमि का बीमा फर्जी तरीके से दूसरे लोगों के नाम पर कर दिया. किसी और की भूमि पर किसी अन्य के नाम पर फसल बीमा किए गए. जांच में पाया गया कि महोबा के किसानों की भूमि का बीमा अन्य जनपदों के लोगों के नाम पर कर करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम उठाया गया. जिनकी भूमि का बीमा होना था, उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उन्हें कोई लाभ मिला. ऐसे तकरीबन 41 किसान जांच में पाए गए जो महोबा के नहीं बल्कि अन्य जिलों के निवासी हैं, लेकिन उनके नाम पर बीमा क्लेम का भुगतान हुआ.
पीएम फसल बीमा योजना को लेकर किसान कई दिनों से सड़कों पर उतरकर न केवल प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि धरने पर बैठकर अनशन भी किया जा रहा है. किसानों ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की और इसी के चलते जिले के DM गजल भारद्वाज ने तीनों तहसीलों में जांच के लिए समिति गठित की.
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जांच की रिपोर्ट ने बीमा घोटाले की परत-दर परत खोलकर रख दीं. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि किसानों का डाटा वेरिफाई किए बिना ही क्लेम का भुगतान कर दिया गया. ऐसे करीब 41 किसान जांच में पाए गए जो महोबा के नहीं बल्कि अन्य जिलों के निवासी हैं, लेकिन उनके नाम पर बीमा क्लेम का भुगतान हुआ.
इस खुलासे के बाद डीएम के निर्देश पर उप कृषि निदेशक राम सजीवन ने शहर कोतवाली में इफको-टोकियो के जिला प्रबंधक निखिल चतुर्वेदी और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 318(4) समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया. बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक और अन्य के खिलाफ दर्ज मुकदमे के बाद कोई गिरफ्तारी न होने से नाराज किसान अभी भी सदर तहसील में धरने पर बैठे हैं. किसान रामदीन और सुरेश कुमार ने बताया कि यह आधी अधूरी कार्यवाही है किसानों के साथ बड़ा धोखा करने वाले आरोपियों को जेल नहीं भेजा जाता तब तक आंदोलन चलता रहेगा.
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