डीजल-पेट्रोल के लिए मारामारीउत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में इन दिनों पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल के लिए भारी भीड़ देखने को मिल रही है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को सुबह से शाम तक लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है. यह समस्या किसी एक पेट्रोल पंप की नहीं, बल्कि जिले के कई पेट्रोल पंपों पर देखने को मिल रही है. जिला प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. उनका कहना है कि कुछ लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवाने और पहले लेने की कोशिश करते हैं, जिससे झगड़े और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है. कुछ किसानों का भी कहना है कि कई लोग जबरदस्ती पहले डीजल लेने की कोशिश करते हैं, जिससे विवाद बढ़ जाता है.
इसी बीच पयागपुर थाना क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में थाना प्रभारी दीपक सिंह लाइन में लगे किसानों के डीजल केन को लात मारकर हटाते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से ऐसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है. वहां पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, जबकि बहराइच में हालात ज्यादा खराब हैं.
बहराइच में डीजल की ज्यादा मांग के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. पहली वजह यह है कि जिले में गेहूं की कटाई और मड़ाई का काम चल रहा है, जिसमें डीजल की जरूरत पड़ती है. दूसरी वजह यह है कि बहराइच को उत्तर प्रदेश में मक्का उत्पादन का बड़ा जिला माना जाता है. मक्का की फसल तैयार होने में करीब एक महीना बाकी है. ऐसे में किसानों को सिंचाई और आने वाली मड़ाई के लिए डीजल की जरूरत पड़ेगी, इसलिए वे पहले से डीजल जमा कर रहे हैं. तीसरी वजह यह भी मानी जा रही है कि किसानों को डर है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं.
इसी आशंका में किसान ज्यादा ईंधन खरीदकर स्टोर करना चाह रहे हैं. वहीं कुछ किसानों का आरोप है कि कुछ पेट्रोल पंप संचालक भीड़ का बहाना बनाकर कुछ समय बाद ईंधन वितरण रोक देते हैं. किसानों का कहना है कि वे भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में अभी कम बिक्री कर रहे हैं. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में बहराइच में डीजल-पेट्रोल को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है और आम लोगों के साथ किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है. (राम बरन चौधरी की रिपोर्ट)
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