पोल्ट्री फीड उत्पादन घटाने का फैसलादेश के पोल्ट्री सेक्टर ने बढ़ती लागत के दबाव के बीच उत्पादन में कटौती का फैसला लिया है. ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA) ने एक हालिया बैठक में यह फैसला लिया. बैठक की अध्यक्षता एआईपीबीए के चेयरमैन बहादुर अली ने की. बैठक में पोल्ट्री उद्योग के सामने खड़े आर्थिक दबाव और फीड लागत में तेजी पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में कहा गया कि बीते एक महीने के दौरान सोयामील (सोयाबीन की खली) की कीमतों में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उद्योग के मुताबिक, फीड लागत बढ़ने से देशभर के पोल्ट्री उत्पादकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है. पोल्ट्री उद्योग संगठनों ने कहा कि लगातार बढ़ती लागत के बीच उत्पादन को पहले की तरह बनाए रखना कठिन होता जा रहा है.
ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA) ने गुरुवार को अपने बयान में कहा, "उत्पादन लागत में तेज बढ़ोतरी और जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान सावन, नवरात्रि और दुर्गा पूजा- त्योहारों की वजह से चिकन की खपत में पारंपरिक गिरावट को देखते हुए उद्योग ने तत्काल प्रभाव से पोल्ट्री उत्पादन में 25 फीसदी कटौती करने का फैसला लिया है." संगठन ने कहा कि यह फैसला बाजार संतुलन बनाए रखने और बढ़ती लागत के असर को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.
इंडस्ट्री ने बताया कि इस फैसले के तहत देशभर में पैरेंट ब्रीडर स्टॉक की कटौती (कुलिंग) शुरू कर दी गई है. उद्योग के अनुसार, पहले जिन ब्रीडर पक्षियों की बिक्री करीब 140 रुपये प्रति पक्षी के आसपास हो रही थी, अब अतिरिक्त स्टॉक निकालने के लिए उन्हें करीब 65 रुपये प्रति पक्षी तक बेचा जा रहा है.
बैठक में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि देश में जरूरत के हिसाब से उत्पादन उपलब्ध होने के बावजूद सोयाबीन कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कीमतों में तेजी के पीछे जमाखोरी और सट्टा गतिविधियां एक कारण हो सकती हैं. साथ ही दावा किया कि NAFED के सोयाबीन स्टॉक की बिक्री के दौरान सीमित समूहों की गतिविधियों से भी बाजार प्रभावित हुआ. उद्योग ने कहा कि इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने उठाया जाएगा.
पोल्ट्री उद्योग संगठनों ने सरकार से जीएम सोयाबीन मील आयात की अनुमति देने की मांग भी दोहराई है. संगठन ने इससे फीड की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों को स्थिर करने में मदद मिल सकती है.
AIPBA के साथ इस मुद्दे पर कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CLFMA), कर्नाटक पोल्ट्री फार्मर्स एंड ब्रीडर्स एसोसिएशन (KPFBA), इंडियन पोल्ट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IPEMA), तेलंगाना पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन और ब्रॉयलर कोऑर्डिनेशन कमेटी तमिलनाडु सहित कई संगठन जुड़े हुए हैं. (पीटीआई)
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