
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 को किया संबोधितमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों में खेती-किसानी के क्षेत्र में आए परिवर्तन के कारण अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है. किसान समाज व राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पहले किसान आत्महत्या पर मजबूर थे. 2005 से 2014 के बीच देश में अलग-अलग स्थानों पर अनगिनत किसानों ने आत्महत्या की थी. इसके पीछे भी त्रासदी थी, उनके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज, उचित एमएसपी, आपदा से बचाव के उपयुक्त प्रबंध नहीं थे. उन्होंने कहा कि लागत अधिक-उत्पादन कम था. यदि किसान ने मेहनत से अन्न उत्पादन किया भी तो उसके क्रय की उचित व्यवस्था नहीं थी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ करने के बाद उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित किया और उन्हें ट्रैक्टर की चाबी व केसीसी प्रमाण पत्र प्रदान किए.
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि और सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी) यूपी में है. रबी-खरीफ व जायद की तीनों फसलों से किसानों को अच्छा दाम भी मिल रहा है. यह किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना. वहीं, किसानों ने कृषि विकास दर को 8 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की.
सीएम ने कहा कि पहली बार कोई सरकार कह रही है कि जैसे हम अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप करवाते हैं, ऐसे ही धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण होना चाहिए. पीएम मोदी ने 2014 से अनिवार्य रूप से फ्री में सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू हुईं. उन्होंने कहा कि दलहन-तिलहन आयात में सरकार को लाखों-करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन किसानों को अच्छे बीज देकर दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष अभियान प्रारंभ किया.
योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया, जिससे अन्नदाता किसान साहूकार के सामने हाथ नहीं फैलाए और न ही कर्ज से दबे. मंडी में व्यापक रिफॉर्म किया गया. प्रदेश में जब डबल इंजन सरकार आई तो उसने भी इसे मजबूती से बढ़ाया. 2017 में पहली कैबिनेट मीटिंग में कर्ज से दबे किसानों को राहत दी गई.

फसल ऋण की विशेष योजना प्रारंभ की गई. प्रयास रहा कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम प्राप्त हो. जगह-जगह सरकारी क्रय केंद्र खोलकर उनकी उपज को खरीदा गया.
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया. 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई, वहीं, सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है.
सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद खाद्यान्न, चीनी, एथेनॉल, आलू, सब्जी व दुग्ध का सर्वाधिक उत्पादन कर रहा है. सरकार के साथ किसानों की मेहनत का परिणाम सामने है. उन्होंने कहा कि सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझावों/परेशानियों की जानकारी लेती है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसान आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा. सरकार का काम है कि किसान शोषण-अभाव से मुक्त हो, उसके सामने चुनौती न हो, उनके कार्यों में बाधाओं को हटाया जाए. उन्हें अच्छा बीज मिल सके, सुविधा संपन्न करने के साथ उन्हें मंडी से जोड़ा जाए और समय पर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए. उत्तर प्रदेश में यह सब संभव हो पा रहा है. यूपी के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि में केवल 11 फीसदी भूमि है, लेकिन वह कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 फीसदी योगदान कर रहा है. यूपी की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 16-17 फीसदी है. जबकि खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसलों में यूपी देश को लीड कर रहा है, इसके बावजूद कई चुनौतियां भी हैं.
सीएम ने कहा कि यूपी में किसानों, सह किसानों (बटाईदारों) व उनके पारिवारिक सदस्यों को भी किसी हादसे की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना का लाभ दिया गया है. इस पर सरकार हर वर्ष एक हजार करोड़ रुपये खर्च करती है. किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली, वन्यजीव संघर्ष का शिकार हुआ तो सरकार 24 घंटे के अंदर पांच लाख रुपये की सहायता परिवार को उपलब्ध कराती है.
योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क तथा कुशीनगर में कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र उत्तम तकनीक व बीज की क्वालिटी के बारे में जानकारी के माध्यम बने हैं. इसके बाद भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है. जितना किसानों ने उत्पादन बढ़ाया है, इसमें अभी लगभग तीन गुना और वृद्धि कर सकते हैं. हमें बीज की क्वालिटी, तकनीक और समय पर खेतीबाड़ी-फसल चक्र को अपनाना पड़ेगा. इससे उत्पादन बढ़ेगा। किसान इस दिशा में कार्य प्रारंभ करें.
मुख्यमंत्री ने चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्पादन का पहला चरण यह है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हों. उन्होंने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा. आम का यहां 40-50 रुपये दाम मिलेगा, जबकि यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशों में 800 से 1000 रुपये मिलता है.
कार्गो का दाम डेढ़ सौ-200 रुपये होगा, फिर भी 600 रुपये प्रति किलो की बचत होगी. इसके लिए क्वालिटी जरूरी है. सरकार ने कार्गो के सेंटर विकसित किए हैं. सीएम ने अपील की कि खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसल आदि में न्यूनतम केमिकल-पेस्टिसाइड का प्रयोग करें.
सीएम ने निर्यात के मानकों पर खरा उतरने पर जोर देते हुए प्राकृतिक खेती (गो आधारित खेती) पर बल दिया. उन्होंने कहा कि इससे गोमाता की रक्षा भी होगी और केमिकल-पेस्टिसाइट से भी खेती का बचाव होगा. यह लागत को कम करने का भी माध्यम हो सकता है. किसान स्वयं वैज्ञानिक है. उसे पता है कि कब क्या करना है, बस तारतम्यता से जोड़ने की तैयारी करें. अतिवृष्टि व अनावृष्टि से बचने के लिए अभी से मौसम विभाग द्वारा दिए जाने वाले बुलेटिन के अनुरूप फसल चक्र को तैयार करें। यह कार्य बढ़ेंगे तो किसान की आमदनी भी बढ़ेगी.
योगी ने फसल के विविधीकरण की चर्चा करते हुए गन्ना, सब्जियों के साथ ही सहफसली खेती पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. पिछले वर्ष मैंने व कृषि मंत्री ने मध्य यूपी के कई जनपदों में जाकर देखा कि किसान ने जैसे ही गेहूं की फसल काटी, तत्काल मक्का की खेती प्रारंभ की. इससे उन्हें एक लाख रुपये प्रति एकड़ की बचत भी हो रही है.
सीएम योगी ने कहा कि पहले यूपी में सुरक्षा, सिंचाई, क्रय केंद्र समेत सरकारी सुविधाएं नहीं थीं तो किसान बमुश्किल एक से दो फसल करता था. अच्छे बीज नहीं मिल पाते थे. आज किसान तीन-तीन फसलें करके अच्छा मुनाफा कमा रहा है. बिना टैक्स बढ़ाए सरकार ने एमएसपी के माध्यम से अच्छा पैसा दिया. 2016-17 में 300 रुपये गन्ना भुगतान था, आज 400 रुपये प्रति कुंतल दिया जा रहा है. तकनीक, अच्छी क्वालिटी के बीज अपनाएं, केमिकल-पेस्टिसाइड को न्यूनतम कर प्राकृतिक खेती पर जोर दें तो बेहतर लाभ मिलेगा.
मुख्यमंत्री योगी ने गोष्ठी की उपयोगिता पर बल दिया और कहा कि आत्मनिर्भर व विकसित भारत के लिए विकसित खेती आज की आवश्यकता है. किसान तीन फसलों का व्यापक पैमाने पर उत्पादन करता है. फसल चक्र से जुड़ी चुनौतियों का कैसे मुकाबला कर सकते हैं, इस पर ध्यान देना होगा. इस बार मानसून औसत से कम बताया जा रहा है. इसके लिए रणनीति तय होनी चाहिए. यह गोष्ठी किसानों को सही दिशा देगी.
ये भी पढ़ें-
कृषि कर्जमाफी या वसूली योजना? महाराष्ट्र सरकार की शर्तों पर भड़की NCP (SP), आंदोलन की दी चेतावनी
Drone Didi: फ्री ट्रेनिंग से बनी ड्रोन पायलट, अब हर महीने 15 हजार रुपये कमाती हैं सुदेश कुमारी
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today