सड़े-गले आम से तैयार हो रहा था मैंगो जूसगर्मियों के मौसम में आम और मैंगो जूस की मांग तेजी से बढ़ जाती है. लोग बाजार से बड़े भरोसे के साथ मैंगो जूस खरीदकर पीते हैं, लेकिन गुजरात के मेहसाणा जिले से सामने आई एक घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, यहां फूड विभाग की एक बड़ी कार्रवाई में खुलासा हुआ है कि कुछ कारोबारी लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हुए सड़े-गले और कीड़ों से भरे आमों से मैंगो जूस तैयार कर रहे थे.
जानकारी के अनुसार, मेहसाणा के नुगर क्षेत्र में स्थित एक मैंगो जूस निर्माण इकाई पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अचानक छापा मारा. यह कार्रवाई जिला फूड अधिकारी वी.जे. चौधरी के मार्गदर्शन में की गई. सीनियर फूड सेफ्टी ऑफिसर जे.जे. प्रजापति के नेतृत्व में टीम जब महादेव इंडस्ट्रियल पार्क स्थित 'पाटीदार रस सेंटर' पहुंची, तो फैक्ट्री के अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए.
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में सड़े हुए, खराब और कीड़ों से संक्रमित आम पाए गए. आरोप है कि इन्हीं आमों से रस निकालकर बाजार में सप्लाई की तैयारी की जा रही थी. यदि यह जूस बाजार तक पहुंच जाता तो बड़ी संख्या में लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फूड विभाग ने तत्काल कार्रवाई की, और मौके पर ही 2025 किलोग्राम खराब आम और लगभग 230 किलोग्राम तैयार मैंगो जूस को नष्ट करवा दिया गया. विभाग के अनुसार नष्ट की गई इस सामग्री का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1 लाख 17 हजार 350 रुपये है.
इसके अलावा अधिकारियों ने जांच के लिए जूस के नमूने भी एकत्र किए हैं, जिन्हें लैब में भेजा गया है. खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, तो फैक्ट्री संचालक पटेल प्रहलादभाई वीरमदास के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
फूड विभाग की इस औचक कार्रवाई से इलाके के अन्य खाद्य कारोबारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है. अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि वे केवल विश्वसनीय और मान्यता प्राप्त प्रतिष्ठानों से ही खाद्य उत्पाद खरीदें और किसी भी संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी तुरंत विभाग को दें. यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि थोड़े से मुनाफे के लिए कुछ लोग आम जनता की सेहत को दांव पर लगाने से भी नहीं चूकते, ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की सतर्कता और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है. (मनीष मिस्त्री की रिपोर्ट)
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