MSP पर चना खरीदराजस्थान में चना खरीद को लेकर किसानों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में 5 मई को जयपुर में बड़ी संख्या में चना उत्पादक किसान जुटेंगे. इस दौरान किसान दाना-दाना चना खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. दरअसल, किसानों के लंबे संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने ‘मूल्य समर्थन योजना’ के तहत चना, मसूर, अरहर और उड़द की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की है.
इसके तहत भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफैड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) को सीधे खरीद की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही पहले लागू कुछ सीमाएं-जैसे कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत खरीदना और एक किसान से एक दिन में 40 क्विंटल तक ही खरीद को भी हटा दिया गया है. इससे किसानों को उम्मीद जगी थी कि उनकी पूरी उपज उचित मूल्य पर खरीदी जाएगी.
लेकिन किसानों का आरोप है कि राजस्थान में इस नियमावली का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है. राज्य सरकार द्वारा नेफैड और एनसीसीएफ जैसी संस्थाओं को खरीद प्रक्रिया से दूर रखा जा रहा है. वर्तमान में अजमेर जिले की किशनगढ़ मंडी में सिर्फ एक खरीद केंद्र चालू है, जहां सीमित मात्रा में ही चना खरीदा जा रहा है. इससे बड़ी मात्रा में उत्पादन करने वाले किसान रजिस्ट्रेशन और बिक्री दोनों में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि वे राजफैड के बजाय नेफैड और एनसीसीएफ के माध्यम से अपनी उपज बेचना चाहते हैं, क्योंकि नई नीति के तहत वहीं 100 प्रतिशत खरीद संभव है. वहीं, राजफैड पर अभी भी पुरानी सीमाएं लागू हैं, जिसके कारण किसान अपनी पूरी उपज नहीं बेच पा रहे हैं. मजबूरी में उन्हें बाजार में कम दाम पर चना बेचना पड़ रहा है.
इस समय चना का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5875 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में इसका भाव 5000 से 5200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है. यानी किसानों को प्रति क्विंटल करीब 700 से 800 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है. बड़े किसानों को यह घाटा लाखों रुपये तक पहुंच रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई है.
किसान महापंचायत के प्रदेश मंत्री बत्ती लाल बैरवा ने ऐसे किसानों से 5 मई को जयपुर पहुंचने की अपील की है, जिनका उत्पादन 40 क्विंटल से अधिक है और जो रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं. किसान महापंचायत का कहना है कि जब तक राज्य में केंद्र की नीति पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक किसानों का यह आंदोलन जारी रहेगा.
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