Wheat export: चार साल बाद भारत से गेहूं का निर्यात शुरू, UAE के लिए पहली खेप रवाना

Wheat export: चार साल बाद भारत से गेहूं का निर्यात शुरू, UAE के लिए पहली खेप रवाना

भारत से चार साल बाद गेहूं का निर्यात फिर शुरू हो गया है. ट्रेड सूत्रों के मुताबिक ITC ने कांडला पोर्ट से 22,000 मीट्रिक टन गेहूं UAE भेजना शुरू किया है. रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद के बीच सरकार ने 2022 में लगे निर्यात प्रतिबंध के बाद इस साल गेहूं एक्सपोर्ट की अनुमति दी है.

Advertisement
Wheat export: चार साल बाद भारत से गेहूं का निर्यात शुरू, UAE के लिए पहली खेप रवानाभारत से गेहूं का निर्यात शुरू

भारत से गेहूं का निर्यात एक बार फिर शुरू हो गया है. व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, भारतीय ट्रेडर्स ने करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद गेहूं का एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया है. यह जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स को सूत्रों के हवाले से मिली है.

सूत्रों ने बताया कि देश की प्रमुख कंज्यूमर गुड्स कंपनी ITC ने पश्चिमी भारत के कांडला पोर्ट से 22,000 मीट्रिक टन गेहूं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी के साथ भारत ने औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से गेहूं की सप्लाई की शुरुआत कर दी है.

2022 में लगा था निर्यात प्रतिबंध

गौरतलब है कि भारत सरकार ने वर्ष 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. उस समय देश में भीषण गर्मी के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ था. उत्पादन घटने और सरकारी भंडार कम होने के चलते घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं.

घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने 2023 और 2024 में भी इस प्रतिबंध को जारी रखा. हालात ऐसे बन गए थे कि पहली बार यह आशंका जताई जाने लगी थी कि भारत को 2017 के बाद पहली बार गेहूं आयात करना पड़ सकता है.

रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद से बदला फैसला

अब हालात बेहतर होते दिख रहे हैं. इस साल भारत में गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार की उम्मीद जताई जा रही है. फसल अच्छी होने और स्टॉक की स्थिति सुधरने के बाद सरकार ने निर्यात को फिर से अनुमति देने का फैसला किया है.

विशेषज्ञों के अनुसार, निर्यात शुरू होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है, वहीं भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति भी मजबूत होगी. खासतौर पर मध्य‑पूर्व और एशियाई देशों में भारतीय गेहूं की मांग पहले से ही बनी हुई है.

बाजार पर पड़ेगा असर

निर्यात शुरू होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ेगी. साथ ही, यह संकेत भी मिलता है कि भारत अब घरेलू आपूर्ति को लेकर पहले से ज्यादा आश्वस्त है.

फिलहाल ITC की यह खेप एक शुरुआत मानी जा रही है. आने वाले समय में यदि फसल और स्टॉक अनुमान के मुताबिक रहे, तो अन्य भारतीय कंपनियां भी गेहूं के निर्यात के लिए आगे आ सकती हैं.

गेहूं खरीद में तेजी

सेंट्रल फूडग्रेन्स प्रोक्योरमेंट पोर्टल और ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 1 मई, 2026 तक, 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए भारत सरकार की गेहूं खरीद 23.25 मिलियन टन (mt) तक पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण पंजाब और हरियाणा में गेहूं की भारी आवक है. हालांकि, बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों की मदद के लिए राष्ट्रीय लक्ष्य को 15% बढ़ाकर 34.5 mt कर दिया गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में खरीद की गति धीमी रही है.

POST A COMMENT